Edited By Desh Raj, Updated: 06 Jul, 2026 08:25 PM

केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी जैसी विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का 'चिता आंदोलन' सोमवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, पुरुष और ग्रामीण...
छतरपुर (राजेश चौरसिया): केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी जैसी विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का 'चिता आंदोलन' सोमवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, पुरुष और ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। आंदोलनकारियों ने प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा, पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रभावितों के समर्थन में आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक वास्तविक प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा और कथित भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका अनशन और आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनसे जबरन उनकी जमीन और गांव छीने गए हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकारी दफ्तरों में हर काम के लिए रिश्वत मांगी जाती है और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने और दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।
बारिश के बीच भी आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा, समुचित पुनर्वास और कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि विस्थापित परिवारों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, परियोजनाओं में हुई कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं प्रशासन की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।