Edited By meena, Updated: 06 Apr, 2026 07:53 PM

कलेक्टर डॉ केदार सिंह ने जिले के शासकीय स्कूलों के निरीक्षण के दौरान एक अलग ही मिसाल पेश की। निरीक्षण के लिए पहुंचे कलेक्टर ने सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि खुद शिक्षक की भूमिका...
शहडोल (कैलाश लालवानी) : कलेक्टर डॉ केदार सिंह ने जिले के शासकीय स्कूलों के निरीक्षण के दौरान एक अलग ही मिसाल पेश की। निरीक्षण के लिए पहुंचे कलेक्टर ने सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि खुद शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों की क्लास भी ली। इस दौरान उन्होंने छात्रों को अनुशासन, पढ़ाई और व्यवहारिक ज्ञान का महत्व समझाया।
वन-टू-वन सवालों से परखी तैयारी
कलेक्टर ने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए वन-टू-वन सवाल पूछे। उन्होंने विलोम शब्द, पर्यायवाची, पहाड़े और सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछकर बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया। छात्रों द्वारा दिए गए सटीक जवाबों से वे काफी प्रसन्न नजर आए और उन्होंने बच्चों की मेहनत व शिक्षकों के प्रयासों की सराहना भी की।
ब्लैकबोर्ड पर खुद पढ़ाया पाठ
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ब्लैकबोर्ड संभालते हुए खुद बच्चों को पढ़ाया। उन्होंने सरल तरीके से विलोम शब्द, पर्यायवाची और गणित के पहाड़े समझाए, जिससे छात्र उत्साहित नजर आए। कलेक्टर का यह अंदाज बच्चों के लिए प्रेरणादायक रहा और पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा।

पढ़ाई के साथ संस्कार पर भी जोर
डॉ. केदार सिंह ने छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए शिष्टाचार और अच्छे संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं। साथ ही, उन्होंने आसान और प्रभावी तरीके से पढ़ाई करने के टिप्स भी दिए, जिससे छात्र अपनी पढ़ाई को बेहतर बना सकें।
रिटेन और ओरल टेस्ट से किया मूल्यांकन
कलेक्टर ने स्कूलों में छात्रों का रिटेन और ओरल टेस्ट भी लिया, ताकि उनकी वास्तविक शैक्षणिक स्थिति को समझा जा सके। इस तरह का निरीक्षण न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है, बल्कि छात्रों और शिक्षकों दोनों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित भी करता है।