Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Jan, 2026 02:56 PM

मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक घटना को लेकर मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार और व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक लेकिन सख्त शब्दों में लिखा कि यह त्रासदी केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की नैतिक विफलता है।
उमा भारती ने सवाल उठाते हुए लिखा - इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे-बैठे बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? उन्होंने इसे ऐसा पाप बताया जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता — या तो प्रायश्चित होगा या फिर दंड।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2025 के अंत में प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले इंदौर में गंदा और जहरीला पानी लोगों की जान ले रहा है। यह घटना न सिर्फ इंदौर, बल्कि पूरी सरकार और व्यवस्था के लिए शर्म और कलंक का विषय है। उन्होंने लिखा कि जहर मिला पानी कई जिंदगियों को निगल चुका है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती
उमा भारती ने मुआवजे की राशि पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दो लाख रुपये किसी इंसान की जिंदगी की कीमत नहीं हो सकती। पीड़ित परिवार जीवन भर इस दुख के साथ जीने को मजबूर रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस अपराध का घोर प्रायश्चित होना चाहिए, पीड़ित परिवारों से माफी मांगी जानी चाहिए और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी दोषी हैं, उन्हें अधिकतम सजा मिलनी चाहिए।
अपने बयान के अंत में उमा भारती ने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए “परीक्षा की घड़ी” बताया और संकेत दिया कि अब केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई की जरूरत है। इंदौर की यह त्रासदी सरकार, प्रशासन और सिस्टम - तीनों के लिए एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी है।