ये कैसा ट्रेंड, MP में बेहतर काम करने वाले अफसरों की गई कलेक्टरी, परफार्मेंस में पीछे रहे 6  IAS फिर बने कलेक्टर,उठ रहे सवाल

Edited By Desh Raj, Updated: 13 Apr, 2026 10:06 PM

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मध्य प्रदेश में कुछ दिन पहले ही IAS अधिकारियों के तबादले हुए थे। एक साथ 26 अफसर यहां से वहां किए गए थे। कइयों को अहम जिम्मेवारियां मिली हैं तो कइयों से कुछ छीना भी गया है। लेकिन इसी बीच आंकड़े एक तस्वीर और भी पेश कर रहे हैं।

(भोपाल): मध्य प्रदेश में कुछ दिन पहले ही IAS अधिकारियों के तबादले हुए थे। एक साथ 26 अफसर यहां से वहां किए गए थे। कइयों को अहम जिम्मेवारियां मिली हैं तो कइयों से कुछ छीना भी गया है। लेकिन इसी बीच आंकड़े एक तस्वीर और भी पेश कर रहे हैं। आकंडे बता रहे हैं कि कई अधिकारियों को खराब और संतोषजनक प्रदर्शन के बाद भी बड़े जिलों की सरदारी सौंपी गई है। यह पैटर्न कई सवाल खड़े कर रहा है।

6 IAS अधिकारियों को दोबारा मिली कलेक्टरी जैसी बड़ी जिम्मेदारी

प्रदेश में 26 IAS अफसरो की  ट्रांसफर चर्चा में है।  खराब राजस्व वसूली और लंबित मामलों के बावजूद कई अधिकारियों को बड़े जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये तैनाती प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी है। सुधार और जवाबदेही तय करने के बीच जारी हुई नई तबादला सूची ने 'परफॉर्मेंस आधारित पदस्थापना' की नीति पर कई सवाल खडे किए हैं। लोक सेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में ज्यादा सफल नहीं होने वाले 6 आईएएस अधिकारियों को हटाकर फिर से कलेक्टरी सौंपी गई है।

जिन जिलों में कामकाज की स्थिति खराब रही है वहां के कलेक्टरों को बड़े जिलों की कमान दी गई है। बात अगर धार की करें तो  राजस्व प्राप्ति लक्ष्य के मुकाबले 39 फीसदी ही रही जबकि  नामांतरण के 3377 मामले पेंडिंग रहे। फिर भी प्रियंक मिश्रा को राजधानी भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं दूसरी ओर रीवा की कमान संभालने वाली प्रतिभा पाल के समय राजस्व वसूली भी महज 58 फीसदी रही, लेकिन उन्हें सागर जिले की कलेक्टरी सौंप दी गई। वहीं मंडला के सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम और बैतूल के नरेंद्र सूर्यवंशी को रीवा की कलेक्टरी मिली है जो लक्ष्यों के पूरा न होने के बाद भी सवाल खड़े करता है। श्योपुर में राजस्व लक्ष्य 71 प्रतिशत होने के बाद भी अर्पित वर्मा को शिवपुरी भेजा गया । वहीं कई अच्छा  काम करने वाले अफसरों को कलेक्टर पद से हाथ धोना पड़ा ।

अगर नर्मदापुरम की बात की जाए तो यहां पर राजस्व प्राप्ति 76 प्रतिशत तो  नल-जल योजना का संचालन 93 प्रतिशत से अधिक था। बावजूद इसके  कलेक्टर सोनिया मीणा को बदलाव का सामना करना पडा। लिहाजा इन तबादलों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

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