Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Jan, 2026 04:55 PM

बारामती में हुए भीषण विमान हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया।
ग्वालियर। (अंकुर जैन): बारामती में हुए भीषण विमान हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के साथ ही इस दुर्घटना में विमान की पायलट कैप्टन शांभवी पाठक की भी दर्दनाक मौत हो गई। खास बात यह है कि शांभवी पाठक का ग्वालियर से गहरा नाता रहा है, जहां से उन्होंने उड़ान भरने का सपना देखा था।
ग्वालियर के Airforce School No.1 से शुरू हुआ था सफर
शांभवी पाठक ने वर्ष 2016 से 2018 के बीच ग्वालियर स्थित एयरफोर्स स्कूल नंबर-1 से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। यहीं रहते हुए उन्होंने पायलट बनने का सपना संजोया और उसे पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की। उस समय उनका परिवार ग्वालियर एयरफोर्स कैंपस में रहता था।
MP Flying Club से बनीं आसमान की प्रशिक्षक
शांभवी न सिर्फ एक कमर्शियल पायलट थीं, बल्कि मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब की सक्रिय सदस्य और असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर भी रहीं। उनके पास फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रेटिंग (A) थी और वे आने वाली पीढ़ी के पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए जानी जाती थीं।
मुंबई से न्यूजीलैंड तक का सफर
शांभवी ने मुंबई यूनिवर्सिटी से Aeronautics, Aviation & Aerospace Science में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड इंटरनेशनल कमर्शियल पायलट अकादमी से प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2022 में उन्होंने अपनी डिग्री पूरी की।
एयरफोर्स की विरासत, पिता रहे स्क्वाड्रन लीडर
शांभवी के पिता विक्रम पाठक भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर तैनात रह चुके हैं और ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन में उनकी पोस्टिंग रही। रिटायरमेंट के बाद वे इंडिगो एयरलाइंस से जुड़े। मां रोली शुक्ला पाठक और छोटा भाई वरुण परिवार का हिस्सा हैं। शांभवी का ननिहाल कानपुर (उत्तर प्रदेश) में है, जबकि परिवार वर्तमान में दिल्ली में रहता है।
देश ने खोई एक होनहार पायलट
कैप्टन शांभवी पाठक सिर्फ एक पायलट नहीं थीं, बल्कि हजारों सपनों को उड़ान देने वाली प्रेरणा थीं। उनका असमय जाना भारतीय विमानन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।