4500 रुपए से 32 हजार तक का सफर: बालाघाट की सुमा उइके बनीं ‘लखपति दीदी’, महिलाओं के लिए बनी मिसाल

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 12 Apr, 2026 07:04 PM

balaghat s suma uikey emerges as lakhpati didi  inspiring rural women

जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की श्रीमती सुमा उइके आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी प्रेरणादायक सफलता का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून 2025 को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया गया था।

बालाघाट: जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की श्रीमती सुमा उइके आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी प्रेरणादायक सफलता का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून 2025 को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया गया था।

जनजातीय परिवार से आने वाली सुमा उइके का जीवन पहले संघर्षों से भरा था। वे केवल घर-गृहस्थी तक सीमित थीं और परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय महज 4500 रुपए थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल था। वर्ष 2019 में उन्होंने ‘जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। रिवाल्विंग फंड की मदद से उन्होंने जैविक मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे आय के नए रास्ते खुले। इसके बाद सुमा उइके ने जनपद पंचायत कटंगी में कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी संभाली और फिर 6 लाख रुपए का मुद्रा ऋण लेकर थर्मल थेरेपी सेंटर की शुरुआत की। इन प्रयासों से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि उन्होंने अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए।

आज उनकी व्यक्तिगत आय 19 हजार रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की कुल आय 32 हजार रुपए हो गई है। सुमा उइके अब अपने गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उनकी यह सफलता कहानी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, अवसर और आत्मविश्वास से कोई भी महिला अपनी परिस्थितियों को बदल सकती है। आज वे नारी सशक्तिकरण की एक मजबूत प्रतीक बनकर उभरी हैं।

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