MP में किसानों का घेरा डालो- डेरा डालो आंदोलन, सरकार के सामने रखी शर्त, कहा- सुरक्षा की लड़ाई है, किसी भी हद तक लड़ेंगे

Edited By meena, Updated: 17 Nov, 2025 02:49 PM

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लैंड पूलिंग कानून के विरोध में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में 18 नवम्बर, मंगलवार से उज्जैन में 'घेरा डालो-डेरा डालो'...

उज्जैन : लैंड पूलिंग कानून के विरोध में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में 18 नवम्बर, मंगलवार से उज्जैन में 'घेरा डालो-डेरा डालो' आंदोलन शुरू होने जा रहा है। किसान संघ के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों किसानों के उज्जैन पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह आंदोलन कलेक्टर एवं आयुक्त कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन रूप से किया जाएगा।

किसान संघ ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार उद्योगों और शहरी विकास के नाम पर लैंड पूलिंग योजना लागू कर किसानों की हजारों एकड़ जमीन उनकी इच्छा के विरुद्ध लेने का प्रयास कर रही है। संगठन का कहना है कि सिंहस्थ क्षेत्र सहित प्रदेश के कई हिस्सों में किसानों पर भूमि समर्पण का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र में व्यापक आक्रोश व्याप्त है।

किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने जारी वक्तव्य में कहा कि जब तक सरकार सिंहस्थ क्षेत्र और संपूर्ण प्रदेश में लैंड पूलिंग कानून को वापस नहीं लेती, तब तक किसान कलेक्टर कार्यालय पर ही रुकेंगे। उन्होंने कहा कि किसान वहीं खाना बनाएंगे, वहीं खाएंगे और वहीं रात्रिविश्राम करेंगे। यह गांव, जमीन और किसान की सुरक्षा की लड़ाई है, जिसे किसी भी हद तक जाकर लड़ा जाएगा। उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

किसानों का कहना है कि पूर्व में सिंहस्थ आयोजन के दौरान अस्थाई रूप से भूमि अधिग्रहित की जाती थी और आयोजन समाप्त होने पर किसानों को जमीन वापस कर दी जाती थी। वे चाहते हैं कि उसी पद्धति का पालन किया जाए। साथ ही यह भी मांग है कि सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों की भूमि पर कोई स्थाई निर्माण न किया जाए। किसान संघ ने सरकार से यह भी कहा है कि लैंड पूलिंग कानून के संबंध में मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति स्पष्ट करें, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।

किसान संगठन का आरोप है कि प्रशासनिक अमला गलत तरीके से पत्र जारी कर किसानों को भ्रमित कर रहा है और जमीन लेने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद विवाद और बढ़ गया है। आंदोलन की तैयारी प्रदेश के 18 जिलों में तहसील स्तर की बड़ी बैठकों के माध्यम से की गई है। किसान अपने निजी वाहनों, ट्रैक्टरों के साथ राशन-पानी, बिस्तर, झंडा और डंडे लेकर अनिश्चितकालीन धरने में शामिल होने आ रहे हैं। संगठन का दावा है कि मंगलवार से आरंभ होने वाला यह आंदोलन प्रदेशव्यापी प्रभाव डालेगा।

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