MP के इस जिले में आएगा अब सियासी भूचाल, 2022 में हुए महापौर चुनाव पर कोर्ट फैसले से कुर्सी पर छाया संकट

Edited By Desh Raj, Updated: 28 Feb, 2026 02:28 PM

court makes major decision on ujjain mayoral election

मध्य प्रदेश के उज्जैन महापौर चुनाव को लेकर एक बड़ा फैसला आया है।  उज्जैन महापौर चुनाव 2022 को लेकर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए चुनाव याचिका को सुनवाई के काबिल माना है। अब इस फैसले से महापौर की कुर्सी पर संकट गहरा सकता...

(उज्जैन): मध्य प्रदेश के उज्जैन महापौर चुनाव को लेकर एक बड़ा फैसला आया है।  उज्जैन महापौर चुनाव 2022 को लेकर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए चुनाव याचिका को सुनवाई के काबिल माना है। अब इस फैसले से महापौर की कुर्सी पर संकट गहरा सकता है। दरअसल ये फैसला उज्जैन नगर निगम महापौर चुनाव 2022 से जुड़े विवाद को लेकर आया है। फैसले से सियासी हलचल भी तेज है। प्रधान जिला न्यायाधीश की अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए महापौर, निर्दलीय प्रत्याशी के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। इस फैसले से अब चुनाव याचिका पर सुनवाई का रास्ता भी साफ हो गया है।

चुनाव में वैध मतों को अस्वीकृत करने का लगा था गंभीर आरोप

दरअसल ये सारा विवाद 60 वैध मतों को लेकर है जो अनुचित रूप से अस्वीकृत कर दिए गए थे। याचिका के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले तो आश्वासन दिया कि यदि आंकड़े गलत पाए गए तो दोबारा से गिनती होगी।  लेकिन बाद में मांग नहीं मानी गई और कोई गिनती नहीं कराई गई।  सबसे गंभीर और बड़े आरोप मतदान केंद्र क्रमांक 274 को लेकर है। दावा किया गया है  कि वहां परमार को 277 मत मिले थे, लेकिन रिकॉर्ड में 217 मत दर्शाए गए। जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था।

कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार की  923 मतों से हुई थी हार

महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार ने परिणाम को चुनौती दी है। नतीजों के अनुसार परमार को 1,33,317 तो भाजपा प्रत्याशी मुकेश टटवाल को 1,34,240 मत मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी परमार ने आरोप लगाया कि मतगणना के बाद घोषित आंकड़े असत्य थे और उन्होंने लिखित रूप से पुनर्मतगणना की मांग की थी।

महापौर मुकेश टटवाल, निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर ने आवेदन देकर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग की थी। अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया है और कहा है कि साक्ष्यों के आधार पर ही असलियत का पता लगेगा।अदालत ने साफ किया कि बिना साक्ष्य के यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि याचिका झूठी है या निराधार है। लिहाजा इस फैसले के बाद महापौर की कुर्सी पर सियासी संकट गहराने लगा है।

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