बड़ी खबर: 1 अप्रैल से नहीं होगी गेहूं खरीदी! सरकार ने बढ़ाई तारीख, कांग्रेस बोली- किसानों की मेहनत का अपमान

Edited By meena, Updated: 30 Mar, 2026 08:36 PM

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मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी और अहम जानकारी निकलकर सामने आई है। 1 अप्रैल से गेहूं खरीदी का इंतजार कर रहे किसानों को अब थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। सरकार ने इस बार गेहूं...

भोपाल : मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी और अहम जानकारी निकलकर सामने आई है। 1 अप्रैल से गेहूं खरीदी का इंतजार कर रहे किसानों को अब थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। सरकार ने इस बार गेहूं खरीदी को लेकर अहम बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से शुरू होने वाली खरीदी को आगे बढ़ाकर 10 अप्रैल 2026 कर दिया है। यह निर्णय सोमवार को हुई कैबिनेट समिति की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए उपार्जन व्यवस्था की समीक्षा की गई। सरकार का मानना है कि इससे व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से तैयार की जा सकेंगी। वहीं इसे लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस हमलावर हो गई है और सरकार पर निशाना साधा है।

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि अलग-अलग संभागों के लिए अलग तारीखें तय की गई हैं। इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होगी, जबकि राज्य के अन्य संभागों में 15 अप्रैल 2026 से खरीदी शुरू की जाएगी। इस विभाजन का उद्देश्य खरीदी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से सुचारु बनाना है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।

कांग्रेस ने कसा तंज

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सरकार पर निशाना साथा। लिखा- किसानों ने आपसे कृषि ऋण जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग की गई थी, गेहूं खरीदी की नहीं! लेकिन आपने गेहूं खरीदी की तारीख 1 अप्रैल से 10 अप्रैल कर यह साफ कर दिया है कि किसानों का गेहूं खरीदने की आपकी नियत ही नहीं है। यह फैसला किसानों के साथ अन्याय और उनकी मेहनत का अपमान है।

बता दें कि सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 2585 रुपये प्रति क्विंटल के MSP के साथ राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी शामिल है। सरकार का कहना है कि खरीदी की तारीख आगे बढ़ने से किसानों को अपनी फसल की तैयारी और मंडियों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। साथ ही, चरणबद्ध खरीदी से भीड़ और अव्यवस्था कम होगी, जिससे उपार्जन प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी। सरकार का यह कदम किसानों को बेहतर सुविधा और उचित मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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