Edited By Vikas Tiwari, Updated: 02 Apr, 2026 07:12 PM

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में कभी नक्सलवाद के लिए कुख्यात रहे इलाकों में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। Kaknar Valley के नीचे बसे सुदूर गांव-कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम अब मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा...
बस्तर (पुष्पेंद्र सिंह): छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में कभी नक्सलवाद के लिए कुख्यात रहे इलाकों में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। Kaknar Valley के नीचे बसे सुदूर गांव-कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम अब मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत बसों का संचालन शुरू हो गया है, जो क्षेत्र में बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है।

जो इलाके कभी दुर्गम रास्तों और माओवाद के साए के कारण विकास से अछूते थे, वहां अब पक्की सड़कों पर बस दौड़ रही है। यह योजना Vishnu Deo Sai और Amit Shah द्वारा 4 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई थी, जिसके तहत बस्तर जिले के चार प्रमुख मार्गों पर बस सेवा संचालित की जा रही है। यह बस सेवा केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई कड़ी बन चुकी है। बस रोजाना Mardapal से चलकर घाटी के गांवों को जोड़ते हुए संभाग मुख्यालय Jagdalpur तक पहुंचती है। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में बड़ी राहत मिली है।
सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और नक्सल समस्या के कमजोर पड़ने के कारण अब इन इलाकों में सड़क निर्माण संभव हो पाया है। इससे न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि ग्रामीणों के मन से अलगाव और डर भी खत्म हो रहा है। स्थानीय सरपंचों का कहना है कि जहां पहले विकास थमा हुआ था, अब वहां स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और साप्ताहिक बाजार जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ककनार घाटी अब विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है और यह बदलाव पूरे बस्तर के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है।