पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन का निधन, उज्जैन पहुंचे CM मोहन, पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

Edited By meena, Updated: 03 Aug, 2026 07:23 PM

former minister paras chandra jain passes away ujjain pays tribute

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ नेता पारस चंद्र जैन के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया। निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल से उज्जैन पहुंचकर...

उज्जैन : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ नेता पारस चंद्र जैन के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया। निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल से उज्जैन पहुंचकर स्व. जैन की पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर, श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिजन को ढ़ांढस बंधाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारस जैन के निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जैन वरिष्ठ एवं लोकप्रिय नेता थे। जनता के बीच उनकी गहरी पैठ थी। उन्होंने राजनीति के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी सराहनीय कार्य किए। वे एक अच्छे पहलवान और सर्वोदयी इंसान के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से स्व. जैन की दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने एवं शोकाकुल परिजन को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जैन उज्जैन उत्तर से छह बार विधायक रह चुके थे, उन्होंने स्कूल शिक्षा, ऊर्जा, वन तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला। ‘पारस पहलवान’ के नाम से प्रसिद्ध श्री जैन अखाड़े में भी अपनी अलग पहचान रखते थे। 

सव. जैन की पार्थिव देह पर मंत्री गौतम टेटवाल, मंत्री इंदर सिंह परमार, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी सहित जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।

मरणोपरांत नेत्रदान दो नेत्रहीन को मिलेगी रोशनी

स्व. पारस चंद्र जैन ने जीवनकाल में ही मरणोपरांत नेत्रदान करने की घोषणा की थी। मरणोपरांत नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इस नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलेगी। उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का छह बार प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व विधायक पारस चंद्र जैन का सोमवार को इंदौर के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उज्जैन के शिप्रा तट स्थित चक्रतीर्थ घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। 

 

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