ऑनलाइन गेम नहीं, जुए का हाईटेक जाल, खैरागढ़ केस से खुली डिजिटल सट्टे की हकीकत

Edited By meena, Updated: 20 Jan, 2026 02:23 PM

online gambling gang arrested in khairagarh

मोबाइल फोन और इंटरनेट ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं इसी तकनीक का दुरुपयोग कर ऑनलाइन सट्टा और डिजिटल जुए का एक खतरनाक तंत्र भी खड़ा हो गया है...

खैरागढ़ (हेमंत पाल) : मोबाइल फोन और इंटरनेट ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं इसी तकनीक का दुरुपयोग कर ऑनलाइन सट्टा और डिजिटल जुए का एक खतरनाक तंत्र भी खड़ा हो गया है। खैरागढ़ जिले में सामने आया ‘शिवा बुक’ ऑनलाइन सट्टा एप का मामला इसी बदलते अपराध मॉडल की एक बड़ी और चिंताजनक मिसाल है, जिसमें छोटे दांव से शुरू होकर करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा था। ऑनलाइन सट्टा पारंपरिक जुए का ही आधुनिक रूप है, जिसमें मैदान, फड़ या बुक्की की जगह मोबाइल एप और वेबसाइट ने ले ली है। ऐसे एप अक्सर अलग अलग नामों से चलते हैं, ताकि पहली नज़र में ये वैध ऑनलाइन गेम या स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म लगें। वास्तव में इनका मकसद लोगों से क्रिकेट, फुटबॉल, कैसीनो गेम, कार्ड गेम या लाइव मैचों पर रुपये लगवाना होता है। इस तरह के नेटवर्क सबसे पहले व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम या फेसबुक के जरिए संपर्क करते हैं। भरोसेमंद दिखने वाले एजेंट लोगों को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराते हैं। शुरुआती दौर में जानबूझकर छोटे-मोटे फायदे दिखाए जाते हैं, जिससे यूजर का भरोसा बढ़े। जैसे-जैसे दांव की रकम बढ़ती है, यूजर इस डिजिटल जुए के दलदल में फंसता चला जाता है।

एप का नाम बदलना, पहचान छुपाने का तरीका

‘शिवा बुक’ जैसे एप अक्सर एक नाम से ज्यादा दिन नहीं चलते। पुलिस या साइबर एजेंसियों की नजर पड़ते ही इन्हें बंद कर नया नाम और नया पैनल शुरू कर दिया जाता है, जैसे 100 पैनल, फेयर प्ले या किसी इंटरनेशनल ब्रांड जैसा नाम। सर्वर, डोमेन और लॉगिन सिस्टम विदेश या दूसरे राज्यों में शिफ्ट कर दिए जाते हैं, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। ऑनलाइन सट्टे का असली इंजन बैंक ट्रांजेक्शन होता है। इसमें आरोपी अलग-अलग राज्यों के लोगों के नाम पर खाते खुलवाते हैं, जिन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। यूजर से पैसा सीधे इन खातों में ट्रांसफर कराया जाता है। रकम को तुरंत कई खातों में घुमा दिया जाता है, ताकि असली सोर्स पकड़ में न आए।

खैरागढ़ प्रकरण में करीब 8 से 10 करोड़ रुपये के लेनदेन का सामने आना इसी डिजिटल मनी ट्रेल की गंभीरता को दिखाता है। लैपटॉप, मल्टी सिम, हाई-स्पीड वाई-फाई, वीपीएन और क्लाउड सर्वर इस नेटवर्क के जरूरी औजार होते हैं। एक कमरे में बैठा व्यक्ति देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे हजारों यूजर्स से जुड़ा रहता है। यही वजह है कि अब ऑनलाइन सट्टा सिर्फ स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय और साइबर क्राइम का बड़ा चेहरा बन चुका है। छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत ऑनलाइन सट्टा गंभीर अपराध है। इसमें न केवल आर्थिक धोखाधड़ी, बल्कि साइबर फ्रॉड और संगठित अपराध की श्रेणी में कार्रवाई होती है। खातों की सीजिंग, डिजिटल उपकरणों की जब्ती और लंबी सजा का प्रावधान कानून में मौजूद है। ऑनलाइन सट्टा सिर्फ पैसा नहीं छीनता, बल्कि परिवार, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ता है। आसान कमाई के लालच में युवा वर्ग सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहा है। कई मामलों में कर्ज, अपराध और आत्मघाती कदम तक की नौबत देखी गई है।

खैरागढ़ पुलिस की कार्रवाई का संदेश

गुरुग्राम जाकर ब्रांच ध्वस्त करना यह साफ संकेत है कि अब ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले यह न समझें कि दूरी या तकनीक उन्हें बचा लेगी। डिजिटल अपराधों के खिलाफ पुलिस भी तकनीकी स्तर पर मजबूत हो रही है और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह मामला सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि डिजिटल युग में बदलते अपराध और उससे निपटने की चुनौती की पूरी तस्वीर पेश करता है जहां मोबाइल की एक क्लिक पर लगने वाला दांव, करोड़ों के अवैध कारोबार में तब्दील हो जाता है।

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