खैरागढ़ में सियासी विस्फोट! पूर्व विधायक पर यौन शोषण के आरोपों से तिलमिलाया लोधी समाज, कर दी बड़ी मांग

Edited By meena, Updated: 02 Mar, 2026 09:07 PM

allegations of physical abuse against former mla komal janghel have infuriated t

खैरागढ़ जिले की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कोमल जंघेल के खिलाफ प्रकाशित कथित यौन शोषण संबंधी खबरों ने माहौल को गरमा दिया है...

खैरागढ़ (हेमंत पाल) : खैरागढ़ जिले की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कोमल जंघेल के खिलाफ प्रकाशित कथित यौन शोषण संबंधी खबरों ने माहौल को गरमा दिया है। जिला लोधी समाज ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है और बड़ी संख्या में कलेक्टर समेत पुलिस प्रशासन के समक्ष पहुंच कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। समाज के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जिन माध्यमों के जरिए यह खबरें प्रकाशित और प्रसारित की गईं, उनके खिलाफ सात दिनों के भीतर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा जिम्मेदार व्यक्तियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयावधि में कार्रवाई नहीं होती, तो व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, गृह मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पुलिस महानिदेशक तथा जिला कलेक्टर को भी प्रेषित की गई है। इससे स्पष्ट है कि मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले चुका है।

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कोमल जंघेल दो बार खैरागढ़ से विधायक रह चुके हैं और छत्तीसगढ़ शासन में संसदीय सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा की कार्यकारिणी से जुड़े हैं। ऐसे में उनके खिलाफ लगे आरोपों और उन पर आधारित खबरों ने राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है। दूसरी ओर, एक महिला द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने की चर्चा ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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यही खामोशी अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है। इतने गंभीर और चर्चित मामले में प्रशासन की चुप्पी क्या संकेत देती है? क्या जांच प्रारंभ हो चुकी है? यदि हां, तो उसकी स्थिति क्या है? संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और त्वरित सूचना बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन फिलहाल स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। खैरागढ़ की सियासत में यह प्रकरण अब सिर्फ आरोप और प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून, मीडिया की जवाबदेही, सामाजिक सम्मान और प्रशासनिक पारदर्शिता की कसौटी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा ही तय करेगी कि इस सियासी तूफान का रुख किस ओर जाता है।

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