भाजपा नेता ले रहे योजनाओं का लाभ, एक से ज्यादा पत्नियां इसलिए नाम सार्वजनिक नहीं किए! पूर्व मंत्री के आरोपों से सियासी घमासान

Edited By meena, Updated: 02 Mar, 2026 05:52 PM

in chhattisgarh there is a political tussle between the bjp and congress over t

छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘कृषक उन्नति योजना’ को लेकर प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है...

रायपुर : छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘कृषक उन्नति योजना’ को लेकर प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि इस योजना के तहत कांग्रेस नेताओं को भी लाभ मिल रहा है। भाजपा का कहना है कि योजना का लाभ पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है, चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा व्यक्ति क्यों न हो।

Amarjeet Bhagat का पलटवार

भाजपा के बयान पर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस नेताओं को योजना का लाभ मिल रहा है तो यह कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि केवल कांग्रेस नेताओं की पत्नी और बहू का नाम सार्वजनिक करने की बात करना उचित नहीं है। यदि पारदर्शिता की बात हो रही है तो भाजपा को अपने नेताओं के परिवार के नाम भी उजागर करने चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि संभव है भाजपा नेता बहुपत्नीक हों, इसलिए नाम सार्वजनिक नहीं कर रहे हों। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।

 

Ajay Chandrakar का जवाब

अमरजीत भगत के बयान पर भाजपा के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक अजय चंद्राकर ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि आंकड़े और नाम सार्वजनिक करने की परंपरा कांग्रेस सरकार के समय से ही शुरू हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री और कृषि-खाद्य मंत्रियों द्वारा योजनाओं के लाभार्थियों के नाम बार-बार सार्वजनिक किए जाते थे। अजय चंद्राकर ने कहा कि जब आज कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं तो उन्हें आपत्ति क्यों हो रही है। उन्होंने अमरजीत भगत के बहुपत्नीक वाले बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस तरह की टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना है।

 

योजना पर सियासत क्यों?

कृषक उन्नति योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन देना है। लेकिन जैसे-जैसे लाभार्थियों की सूची सामने आई, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए और तेज हो सकता है। फिलहाल योजना के लाभ से ज्यादा चर्चा नेताओं के बयानों की हो रही है।

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