Edited By Desh sharma, Updated: 28 Jan, 2026 11:49 PM

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। ग्वालियर पहुंचे द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है।
ग्वालियर (अंकुर जैन):अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। ग्वालियर पहुंचे द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है। शंकराचार्य पद को लेकर उठ रहे विवादों पर उन्होंने कहा कि शंकराचार्य सरकार नहीं बनाती। शंकराचार्य वही होता है जो गुरु परंपरा से शिष्य हो और जिसका अन्य शंकराचार्यों द्वारा अभिषेक किया गया हो। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य सरकार नहीं बनाती है। शंकराचार्य का शिष्य ही शंकराचार्य होता है। गुरु का शिष्य हो और जिनका अभिषेक शंकराचार्यों द्वारा किया गया हो।
मैने और श्रींगेरी के शंकराचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद का अभिषेक किया है-सदानंद
शंकराचार्य सदानंद ने कहा कि मैने और श्रींगेरी के शंकराचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अभिषेक किया है, इसलिए सशंय कहा है। किसी भी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाने का अधिकार सरकार को नहीं है। पिता की संपंति पुत्र को स्वाभाविक रुप से प्राप्त होती है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के शिष्य हैं, जब मैने और श्रींगेरी के शंकराचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अभिषेक किया है तो फिर क्या प्रमाण चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से किसी को रोका नहीं जा सकता। प्रशासन का काम रोकना नहीं बल्कि श्रद्धालुओं को स्नान की सुविधा उपलब्ध कराना है। शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि जब करोड़ों लोगों को स्नान के लिए बुलाया गया था, तब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ केवल सौ लोग थे।
ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति कर श्रद्धालुओं और साधु-संतों को सुविधा प्रदान करे। उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्य और अखाड़े संगम में स्नान नहीं कर पाएंगे तो माघ मेले का महत्व ही समाप्त हो जाएगा। गंगा में कहीं भी स्नान किया जा सकता है, लेकिन त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है।