Edited By meena, Updated: 23 Jan, 2026 04:35 PM

मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के किसी भी विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार ने इन पदों पर आउटसोर्स...
भोपाल/ग्वालियर (अंकुर जैन) : मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के किसी भी विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार ने इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति से संबंधित पूर्व में जारी आदेश को भी निरस्त कर दिया है। इससे पहले ही राज्य सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया को बंद कर चुकी थी। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बड़ा हमला बोला है। वित्त विभाग ने 31 मार्च 2023 को विभागों में चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं लेने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि, इन नियुक्तियों को बजट की उपलब्धता से जोड़ा गया था। अब सरकार ने उस व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया है।
31 मार्च के बाद 12 हजार कर्मचारियों पर संकट
इस फैसले का सबसे बड़ा असर मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है। कंपनी में करीब 12 हजार आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न कार्यों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। मौजूदा एजेंसियों की टेंडर अवधि 31 मार्च को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नई निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
टेंडर दस्तावेज नहीं होने से देरी
सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा विभाग टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अब तक तैयार नहीं कर पाया है। इसी कारण वितरण कंपनियां नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रही हैं। इस देरी के चलते कर्मचारियों को आगे भी काम मिल पाएगा या नहीं, इस पर असमंजस बना हुआ है।
दो साल पुराना आदेश भी हुआ खत्म
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में वित्त विभाग ने नियमित भर्तियां पूरी होने तक आउटसोर्स सेवाएं लेने की अनुमति दी थी। विभाग प्रमुख बजटीय प्रावधानों के तहत आउटसोर्स एजेंसी का चयन कर सकते थे, लेकिन अब इस व्यवस्था को भी पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
जीतू पटवारी ने साधा निशाना
चतुर्थ श्रेणी में आउटसोर्स भर्ती बंद किए जाने पर जीतू पटवारी ने कहा कि स्वाभाविक है कि आउटसोर्स इसलिए शुरू किया गया क्योंकि नियमित नौकरियां नहीं दे रहे थे। पद ईमानदारी से भर नहीं रहे थे। भारतीय जनता पार्टी पूरी सरकार आउटसोर्स पर चलाना चाहती है। मंत्रालय आउटसोर्स पर देना चाहती है। हॉस्पिटल आउटसोर्स कर चुकी है। स्वास्थ्य विभाग आउटसोर्स कर चुकी है। स्वाभाविक है कि यह आउटसोर्स की सरकार है। लेकिन जिन कर्मचारियों ने सालों काम किया उनके भविष्य का क्या..? जाहिर है कि बीजेपी सरकार असंवेदनशील है इसे किसी की संवेदनाओं से कोई मतलब नहीं है।