सड़क पर पड़े गड्ढे ने ले ली युवा कारोबारी की जान! कार उछलकर पेड़ से टकराई,इंजन 20 फीट दूर गिरा, खुशियां मातम में तब्दील

Edited By Desh sharma, Updated: 28 Sep, 2025 03:01 PM

a pothole claimed the life of a young businessman his car veered off and hit a

छतरपुर से एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है।  सड़क के पड़े गड्ढे एक युवक की मौत का कारण बन गए, अनियंत्रित होकर कार पेड़ से टकराने से  युवक को जाने से हाथ धोना पड़ा।

छतरपुर (राजेश चौरसिया): छतरपुर से एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है।  सड़क के पड़े गड्ढे एक युवक की मौत का कारण बन गए, अनियंत्रित होकर कार पेड़ से टकराने से  युवक को जाने से हाथ धोना पड़ा। जिले के नौगाँव में शनिवार की आधी रात करीब 2 बजे नौगांव नगर गूंज उठा। नगर के युवा कारोबारी और कार बाजार संचालक 28 साल के  शिवम पटेरिया की कार सड़क पर बने गहरे गड्ढों से टकराकर पेड़ से भिड़ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का इंजन 20 फीट दूर जाकर गिरा। मौके पर ही शिवम की मौत हो गई।

खुशियों से मातम तक का सफर..

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शनिवार को शिवम अपने परिवार के साथ छतरपुर में रिश्तेदार के घर मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। घर लौटते वक्त किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह सफर खुशियों से सीधे मातम में बदल जाएगा। घर से कुछ ही दूरी पर हुई इस दुर्घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

मां और बहन जिंदगी के लिए जूझ रहीं

हादसे में शिवम की मां क्रांति देवी (50 वर्ष) और बहन रुचि पटेरिया गंभीर रूप से घायल हो गईं। दोनों को पहले नौगांव स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से उन्हें हालत नाजुक होने पर छतरपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। घर की खुशियां अब आईसीयू की बेड से जुड़ी हैं और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

सड़क के गड्ढे बने मौत के गड्ढे...

यह हादसा उस जगह हुआ जहां शराब ठेका के सामने सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे पड़े हैं। इन्हीं गड्ढों से कार उछली और संतुलन बिगड़ने पर पेड़ से जा भिड़ी। यह सड़क पी डब्ल्यू डी के अधीन है और बरसात शुरू होने के साथ ही यहां मौत जैसे गड्ढे बन गए हैं। लोगों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की लापरवाही ने एक जिंदादिल बेटे और युवा व्यापारी को समय से पहले छीन लिया। स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि कई  बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया। अब क्या पीडब्ल्यूडी शिवम की मौत की जिम्मेदारी लेगा?”

नौगांव का यह हादसा केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि प्रशासन और विभाग की उदासीनता का खामियाजा है। सवाल साफ है – कब तक गड्ढों पर जिम्मेदारों की खामोशी और जनता की जान की कीमत चुकानी पड़ेगी?

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