बालाघाट में बच्चों की मौत पर बवाल, गांव पहुंचे अभिजीत दिपके; प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग

Edited By Himansh sharma, Updated: 12 Sep, 2026 04:09 PM

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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बच्चों की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बच्चों की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। कथित संक्रामक बीमारियों से बच्चों की मौत के मामले के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके ने शनिवार को प्रभावित आदिवासी इलाकों का दौरा किया। उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने हाल के दिनों में अपने बच्चों को खोया है। दिपके ने मौके पर हालात का जायजा लेने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठाई।

गांवों के दौरे के दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उनकी परेशानियों को समझने का प्रयास किया। दिपके ने कहा कि उनका यहां आने का मकसद किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होना जरूरी है।

हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है मामला

बालाघाट में बच्चों की मौत का यह मामला अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। इसी सप्ताह जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीर दावे किए गए हैं। इसमें 30 से अधिक बच्चों की मौत का उल्लेख किया गया है। हालांकि, मौतों के वास्तविक कारणों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर प्रशासनिक एवं न्यायिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

50 बेड की क्षमता, इलाज के लिए बड़ी संख्या में बच्चे

याचिका में स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि जिस अस्पताल में करीब 50 बेड की व्यवस्था है, वहां लगभग 400 बच्चों का इलाज किए जाने की स्थिति सामने आई। इससे प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े हुए हैं।

इसके अलावा याचिका में कुछ गांवों के हैंडपंपों से पीले रंग का पानी आने का दावा भी किया गया है। प्रभावित इलाकों में लंबे समय से बच्चों और महिलाओं को पर्याप्त पौष्टिक भोजन नहीं मिलने की बात भी याचिका में कही गई है।

स्वास्थ्य, पानी और पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल

मामले ने सिर्फ बच्चों की मौत तक सीमित सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और पोषण व्यवस्था की स्थिति पर भी चर्चा तेज कर दी है। अब अभिजीत दिपके के प्रभावित गांवों के दौरे के बाद प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग और मुखर हुई है।

फिलहाल पूरे मामले में हाईकोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों के जवाब का इंतजार है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि बच्चों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर लगाए गए आरोपों की हकीकत क्या है।

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