Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Sep, 2026 01:53 PM

मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए वहां की स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। दीपके ने देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में एक गांव के नल से मटमैले रंग का पानी निकलता हुआ दिखाई दे रहा है। दीपके ने दावा किया कि यह वीडियो बालाघाट जिले के प्रभावित क्षेत्र का है। वीडियो के साथ उन्होंने जनप्रतिनिधियों और सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या मंत्री और विधायक अपने बच्चों को ऐसा पानी पिलाएंगे?
इस वीडियो के सामने आने के बाद बालाघाट में पेयजल व्यवस्था और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। हालांकि, वीडियो में दिख रहे पानी की वास्तविक गुणवत्ता और उसके स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता को लेकर आधिकारिक जांच की स्थिति स्पष्ट होना भी जरूरी है।
प्रभावित गांवों के दौरे के बाद दीपके का सरकार पर हमला
अभिजीत दीपके ने हाल ही में बालाघाट के उन गांवों का दौरा किया था, जहां आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। दौरे के बाद उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक पत्र भी साझा किया था। इस पत्र में उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही थी। यह पोस्ट सरकार की व्यवस्था पर तंज के तौर पर की गई थी।
दीपके लगातार बालाघाट के हालात को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट साझा कर रहे हैं। उनके ताजा वीडियो ने साफ पानी और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार की जवाबदेही का मुद्दा फिर सामने ला दिया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार के कदम
उधर, आदिवासी बच्चों की मौत के मामले के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग भी बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। विभाग की ओर से जिले में मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा जिले में दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और एक सिविल अस्पताल के साथ दो नए मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) को स्वीकृति देने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जरूरत के अनुसार 67 नए मेडिकल ऑफिसर्स की पदस्थापना भी बालाघाट जिले में की गई है।
डिप्टी सीएम ने की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रविवार को भोपाल स्थित अपने निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखने मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य अमले की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
बैठक में जन्मजात बीमारियों से प्रभावित बच्चों की पहचान और उनके समय पर उपचार पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए तथा जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
बालाघाट में बच्चों की मौत के बाद अब स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। ऐसे में दीपके द्वारा साझा किए गए वीडियो ने सरकार के सामने एक और सवाल खड़ा कर दिया है, क्या प्रभावित गांवों में लोगों को सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं वास्तव में मिल पा रही हैं?