जिंदा जलाए गए BJP नेता, गरमाई सियासत! प्रदेश अध्यक्ष बोले- रेत के कारोबार में एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए भाजपाई

Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Jun, 2026 05:14 PM

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छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत उत्खनन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत उत्खनन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार और उनके रिश्तेदार वीरू सिंह की दर्दनाक मौत के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार और भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि रेत कारोबार में कथित राजनीतिक दखल और माफिया तंत्र को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार, कोरिया जिले में रेत उत्खनन को लेकर भाजपा से जुड़े लोगों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि हमले के दौरान एक फॉर्च्यूनर वाहन में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई, जिससे भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से झुलसे वीरू सिंह ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। घटना में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जारी है।

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। घटना की जांच कई पहलुओं से कीCollapse जा रही है।

इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना को लेकर भाजपा और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में रेत कारोबार को लेकर सत्ता से जुड़े लोगों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, जिसके कारण हिंसक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बैज ने कहा कि रेत माफिया बेलगाम हो चुके हैं और सरकार उन्हें संरक्षण देने में लगी है।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रेत उत्खनन को लेकर विवाद, मारपीट, चाकूबाजी और हत्याओं जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रही है। वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस कार्रवाई और जांच पर भरोसा जताया जा रहा है।

कोरिया की यह घटना अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है, बल्कि प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक गर्माने के संकेत दे रहा है। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।

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