Edited By Himansh sharma, Updated: 09 May, 2026 03:46 PM

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में आयोजित सुशासन तिहार उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया
बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में आयोजित सुशासन तिहार उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब प्रतापपुर से बीजेपी विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने मंच से ही राजस्व अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखा हमला बोल दिया। ग्रामीणों की शिकायतों से नाराज विधायक ने अधिकारियों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि पढ़-लिख लेने से कोई जनता से बड़ा नहीं हो जाता, जनता का श्राप बड़े-बड़े लोगों का गुरूर तोड़ देता है।
वाड्रफनगर ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जमीन सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा और पट्टा जैसे मामलों में महीनों से हो रही देरी और दफ्तरों के चक्कर कटवाने की शिकायत विधायक के सामने रखी। लोगों ने बताया कि सुबह से बसों में सफर कर सरकारी कार्यालय पहुंचने के बावजूद उनका काम नहीं होता और वे निराश होकर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
जनता की पीड़ा सुनते ही विधायक पोर्ते का गुस्सा मंच से फूट पड़ा। उन्होंने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि “आपके हाथ में कलम की ताकत है, लेकिन हमारे पास जनता की ताकत है। सरकार योजनाएं बना सकती है, मगर उसका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है।
विधायक ने अफसरों को केवल कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय गांव-गांव जाकर काम करने और गरीब हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी बन जाना उपलब्धि हो सकती है, लेकिन इस पद का गुरूर जनता की आह के सामने ज्यादा दिन नहीं टिकता।
सुशासन तिहार के मंच से दिया गया यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों के बीच यह वीडियो प्रशासनिक लापरवाही और जनता की परेशानियों को लेकर बड़ी बहस का विषय बन गया है। बलरामपुर में अफसरों पर भड़की विधायक पोर्ते का यह मामला कोई पहला विवाद नहीं है। इससे पहले सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा भी राजपुर में भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान एसडीएम और तहसीलदार की गैरमौजूदगी पर खुलकर नाराजगी जता चुकी हैं। उन्होंने मंच से ही 24 घंटे में एसडीएम को हटाने की मांग कर दी थी, जिसका वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था।