Edited By Himansh sharma, Updated: 06 Jun, 2026 06:43 PM

मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं।
भोपाल: मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं। नामांकन प्रक्रिया के बीच सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर हो रही है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बयान राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ गया है।
इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान जब मुख्यमंत्री से राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “तीसरी सीट आएगी नहीं तो जाएगी कहां?” मुख्यमंत्री का यह छोटा सा जवाब भाजपा के आत्मविश्वास और चुनावी रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
दरअसल, राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। विपक्ष संख्या बल के आधार पर अपनी संभावनाएं तलाश रहा है, जबकि भाजपा लगातार अपनी स्थिति मजबूत बता रही है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि पार्टी को न सिर्फ अपने विधायकों पर भरोसा है, बल्कि वह चुनावी समीकरणों को भी अपने पक्ष में मानकर चल रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री ने भले ही यह बात हल्के अंदाज में कही हो, लेकिन इसके पीछे भाजपा का स्पष्ट संदेश छिपा है। पार्टी यह जताना चाहती है कि राज्यसभा चुनाव में उसके सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है और तीसरी सीट पर भी उसका दावा मजबूत है।
वहीं विपक्ष मुख्यमंत्री के इस आत्मविश्वास को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। आने वाले दिनों में क्रॉस वोटिंग, निर्दलीय और अन्य दलों के विधायकों की भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज होने की संभावना है। फिलहाल मुख्यमंत्री के एक वाक्य ने राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मुद्दा बना दिया है।