Edited By Himansh sharma, Updated: 27 Mar, 2026 12:38 PM

भारत देश की एकता और अखंडता यूं ही विश्व भर में प्रसिद्ध नहीं है। यहां सभी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं
दमोह (इम्तियाज़ चिश्ती): भारत देश की एकता और अखंडता यूं ही विश्व भर में प्रसिद्ध नहीं है। यहां सभी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं, फिर चाहे वे किसी भी धर्म या मजहब से हों।
ऐसी ही एक दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है मध्यप्रदेश के दमोह जिले से, जहां एक बुजुर्ग हिन्दू महिला, जिन्हें इलाके में ‘बुआ’ कहा जाता था — ताराबाई तिवारी — की अष्टमी के दिन अचानक मृत्यु हो गई।
अष्टमी की पूजा होने के कारण हिन्दू समाज के लोग किसी वजह से उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में बस्ती के मुस्लिम भाइयों ने आगे आकर बुजुर्ग महिला का हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया।
दमोह नगर के वार्ड ‘पुराना बाजार’ में, जैसा कि इस इलाके का नाम है, वैसे ही यहां के लोगों के दिल भी आज तक पुराने संस्कारों और परंपराओं से जुड़े हुए हैं। एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहना यहां की पहचान है। इसी मुस्लिम बस्ती में एक प्राचीन हजारी जी का मंदिर स्थित है, जहां मोहल्ले की ‘बुआ’ ताराबाई तिवारी रहती थीं। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ली। गुरुवार का दिन और अष्टमी का अवसर था।
ताराबाई तिवारी के समाज के लोग अष्टमी की पूजा में व्यस्त होने के कारण शामिल नहीं हो सके। ऐसे में घर के कुछ लोगों के साथ पड़ोसी मुस्लिम भाई उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और उन्हें श्मशान घाट तक ले गए, जहां उनका विधिवत अंतिम संस्कार किया गया। बुजुर्ग ताराबाई तिवारी के परिवार के सदस्य मोनू तिवारी ने बताया कि, “हमारे इस दुख की घड़ी में वार्ड के सभी मुस्लिम भाइयों ने आगे आकर हमारी दादी के अंतिम संस्कार में सहयोग किया। हम लोग हमेशा से मिलजुलकर रहते आए हैं।”
ताराबाई तिवारी वार्ड में ‘बुआ’ के नाम से जानी जाती थीं। जब अष्टमी के कारण हिन्दू समाज के लोग शामिल नहीं हो सके, तब वार्ड के ही शहबाज़ खान, मोहसिन खान और मुबारक खान आगे आए।उन्होंने अपने अन्य मुस्लिम साथियों के साथ मिलकर न सिर्फ अंतिम यात्रा में कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट तक पहुंचकर अपनी ‘तारा बुआ’ को अंतिम विदाई भी दी।