Edited By Himansh sharma, Updated: 05 Jul, 2026 10:53 AM

मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है
दतिया। मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है, लेकिन संगठनात्मक एकजुटता के दावों के बीच टिकट को लेकर असमंजस और नेताओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दतिया में कार्यकर्ताओं के साथ लंबा मंथन किया। बैठक में चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई, लेकिन उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका।
बैठक के दौरान जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील की। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दतिया की जनता इस बार अहंकार की राजनीति को जवाब देगी। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की ओर माना गया।
इसी बीच टिकट के संभावित दावेदार अवधेश नायक ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए अपना दर्द भी सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार उनका टिकट किन परिस्थितियों में कटा, यह सभी जानते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस बार जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, वे पूरी निष्ठा और ताकत के साथ उसके पक्ष में प्रचार करेंगे।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए और संगठन के भीतर एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक रूप से काम करना होगा।
वहीं पूर्व विधायक राजेंद्र भारती स्वास्थ्य कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके। हर्निया ऑपरेशन के बाद उन्होंने फोन के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और भरोसा दिलाया कि स्वस्थ होते ही चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनके निर्वाचन से जुड़े मामले की सुनवाई 8 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित है।
करीब पूरे दिन चली बैठक के बावजूद कांग्रेस दतिया उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के नाम पर सहमति नहीं बना सकी। हालांकि शीर्ष नेतृत्व ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी, टिकट को लेकर बढ़ती दावेदारी और अंदरूनी मतभेद यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब भी सर्वसम्मति से उम्मीदवार तय करना है। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों की नजर कांग्रेस के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है..