EOW का बहुत बड़ा एक्शन, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में संगीन घोटाला, करोड़ों की हानि पर FIR दर्ज

Edited By Desh sharma, Updated: 03 Jan, 2026 06:49 PM

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मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड से जुड़ी संपत्तियों को नियम विरुद्ध तरीके से किराए पर देकर करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के बाद तत्कालीन पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज...

भोपाल (इजहार खान): मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड से जुड़ी संपत्तियों को नियम विरुद्ध तरीके से किराए पर देकर करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के बाद तत्कालीन पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई

ईओडब्ल्यू को यह शिकायत उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 27 जुलाई 2023 को भेजे गए पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई थी। शिकायत के साथ वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज़ और पूर्व जांच समिति की रिपोर्ट भी संलग्न थी। आरोप था कि वक़्फ़ बोर्ड की औक़ाफ़ आम्मा संपत्तियों को वक़्फ़ अधिनियम 1995 और वक़्फ़ संपत्ति पट्टा नियम 2014 का उल्लंघन कर लीज पर दिया गया और बिना अनुमति स्थायी निर्माण की स्वीकृति दी गई।

वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों में घोटाला

शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने 3 अक्टूबर 2023 को प्रारंभिक जांच क्रमांक 03/2023 दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच गठित इंतज़ामिया कमेटी औक़ाफ़ आम्मा, भोपाल के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। इस 11 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खान थे, जबकि फुरकान अहमद सचिव और मोहम्मद जुबेर सह-सचिव के रूप में कार्यरत थे।

2.54 करोड़ की क्षति पर FIR दर्ज

जांच में पाया गया कि समिति ने वक़्फ़ बोर्ड की अनुमति के बिना 185 से अधिक वक़्फ़ संपत्तियों में किरायेदारी परिवर्तन किए। इन मामलों को कागजों में “किरायेदारी परिवर्तन” बताया गया, जबकि वास्तव में पुराने किरायेदारों को हटाकर नए लोगों को नए पट्टे दे दिए गए। यह प्रक्रिया न तो सार्वजनिक सूचना के माध्यम से अपनाई गई और न ही बोली या विज्ञापन की वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया।

हर साल लगभग 2 करोड़ 76 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए था

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि इन 185 संपत्तियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 83 हजार 390 वर्गफुट है, जिनकी कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार कुल कीमत करीब 59 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक है। नियमों के मुताबिक इनसे हर साल लगभग 2 करोड़ 76 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए था, लेकिन वास्तव में केवल करीब 21 लाख रुपये का ही वार्षिक किराया वसूला गया। इससे वक़्फ़ बोर्ड को प्रतिवर्ष करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कई संपत्तियों पर बिना अनुमति स्थायी निर्माण कराए गए, जिससे नियमों का खुला उल्लंघन हुआ और निजी व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन मुतवल्ली शौकत मोहम्मद, सचिव फुरकान अहमद और सह-सचिव मोहम्मद जुबेर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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