Edited By Desh Raj, Updated: 24 Feb, 2026 07:31 PM

राजधानी भोपाल में न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। करीब 25 वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और गबन के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने विस्तृत जांच के बाद एफआईआर दर्ज की है।...
भोपाल (इजहार खान): राजधानी भोपाल में न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। करीब 25 वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और गबन के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने विस्तृत जांच के बाद एफआईआर दर्ज की है। मामले में संस्था के पदाधिकारियों सहित कई लोगों पर करोड़ों रुपये के गबन और मूल सदस्यों से धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह संस्था वर्ष 1981 में मध्यमवर्गीय परिवारों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई थी।भोपाल के ग्राम बागमुगालिया में लगभग 3.5 एकड़ जमीन खरीदी गई।सदस्यों से पैसे लेकर प्लॉट देने का वादा किया गया।लेकिन जांच में सामने आय की संस्था के पदाधिकारियों ने मिलीभगत कर जमीन रिश्तेदारों और बाहरी लोगों को बेच दी।मूल सदस्यों को प्लॉट नहीं दिए गए।कई भूखंडों का आकार बदलकर गैर-सदस्यों को करोड़ों में बेचा गया।
अधिग्रहण के मुआवजे में भी खेल
सड़क निर्माण के लिए करीब 2 एकड़ भूमि अधिग्रहित हुई।सरकार से मिला मुआवजा सदस्यों को नहीं दिया गया।मुआवजे का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड भी नहीं मिला।
अवैध सदस्य जोड़कर की गई बिक्री
जांच में खुलासा हुआ कि संस्था में मूल रूप से 100 सदस्यों का प्रावधान था।बाद में अवैध रूप से नए सदस्य जोड़ दिए गए ।पुराने सदस्यों के नाम हटाकर नए लोगों को प्लॉट दे दिए गए।2005–06 में 19 नए सदस्य जोड़े गए।2006–07 में 3 पुराने हटाकर 9 नए जोड़े गए।2007–08 में 44 नए सदस्य अवैध रूप से शामिल किए गए।
नक्शों में हेरफेर और अवैध निर्माण
वर्ष 2004 में केवल 45 प्लॉट की मंजूरी थी।बाद में अवैध संशोधन कर अधिक प्लॉट दिखाए गए।आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक में बदल दिया गया।2023 में नया नक्शा भी अवैध तरीके से पास कराया गया
करोड़ों की आर्थिक हानि
जांच में सामने आया 28 प्लॉट कम कीमत दिखाकर रजिस्ट्री किए गए।संस्था को लगभग 8.84 करोड़ रुपये का नुकसान।शासन को करीब 4.5 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान।2023–24 में अवैध रजिस्ट्रियों से करीब 9 करोड़ रुपये का गबन।वास्तविक बाजार मूल्य के अनुसार कुल लेनदेन लगभग 40 करोड़ रुपये के आसपास।
मूल सदस्यों के साथ धोखाधड़ी
कई लोगों ने वर्षों तक पैसे जमा किए ।आवंटन पत्र भी मिले।फिर भी उन्हें प्लॉट नहीं दिए गए।उनके नाम पर आवंटित जमीन दूसरों को बेच दी गई।
रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी
जांच में यह भी पाया गया मीटिंग मिनट्स और लेखा दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएँ।कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब।लंबित न्यायालयीन मामलों की जानकारी छिपाकर रजिस्ट्रियां की गईं। संस्था के पूर्व पदाधिकारी, हस्ताक्षरकर्ता और सहयोगियों सहित 17 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है।