Edited By Himansh sharma, Updated: 20 Apr, 2026 06:20 PM

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में बारिश मापने के लिए ऑटोमैटिक रेन गेज लगाए जाएंगे
भोपाल: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में बारिश मापने के लिए ऑटोमैटिक रेन गेज लगाए जाएंगे, जिससे किसानों को मौसम की सटीक और तेज जानकारी मिल सकेगी। सरकार की इस नई योजना के तहत प्रदेश की 23,634 ग्राम पंचायतों में रेन गेज और 444 तहसीलों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि अब बारिश और मौसम का डेटा हर 15 मिनट में अपडेट होगा। यानी किसानों को यह जानने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा कि उनके क्षेत्र में कितनी बारिश हुई। जानकारी सीधे सरकारी पोर्टल पर पहुंचेगी, जिससे सूखा, अतिवृष्टि और फसल नुकसान की स्थिति का तुरंत आकलन किया जा सकेगा। अभी तक मौसम की रिपोर्ट जिला या ब्लॉक स्तर पर ही उपलब्ध होती थी, जिससे कई बार सही स्थिति सामने नहीं आ पाती थी।
एक ही तहसील के अलग-अलग गांवों में मौसम की स्थिति अलग होती है, लेकिन डेटा की कमी के कारण किसानों को फसल बीमा का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। अब पंचायत स्तर पर सटीक रिपोर्ट मिलने से नुकसान का सही आकलन होगा और बीमा क्लेम की प्रक्रिया भी तेज होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 100 से 120 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। एक रेन गेज की लागत लगभग 35 से 40 हजार रुपए होगी, जबकि तहसील स्तर पर लगने वाले वेदर स्टेशन पर 1.5 से 2 लाख रुपए तक खर्च आएगा। केंद्र सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग के तहत 50 प्रतिशत राशि देगी, जबकि बाकी खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
यह पूरा सिस्टम सौर ऊर्जा से संचालित होगा और इसमें मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी। मशीनों में आधुनिक सेंसर और सिम कार्ड लगे होंगे, जो तापमान, नमी, हवा की गति और वर्षा जैसी जानकारियां वायरलेस तकनीक के माध्यम से सीधे केंद्रीय सर्वर तक पहुंचाएंगे।
सरकार ने इस योजना को जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अप्रैल 2026 से टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और चयनित कंपनियों को अगले 6 से 9 महीनों के भीतर सभी उपकरण लगाने होंगे। साथ ही अगले 5 वर्षों तक इन मशीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसियों की होगी। इस नई व्यवस्था से किसानों को न सिर्फ मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि फसल बीमा, मुआवजा और खेती की योजना बनाने में भी बड़ी मदद मिलेगी। यह कदम खेती को तकनीक से जोड़ने और किसानों की आय सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।