विकसित मध्यप्रदेश-2047’ की वित्तीय रूपरेखा तैयार,अब योजनाओं की जवाबदेही और परिणाम पर होगी फंडिंग,नए बजट निर्देश जारी

Edited By Desh Raj, Updated: 06 Aug, 2026 10:55 PM

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मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट, 2026-27 के पुनरीक्षित अनुमान (RE) तथा 2028-29 एवं 2029-30 के रोलिंग बजट की तैयारी के लिए विस्तृत बजट कार्यक्रम और व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

(भोपाल) : मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट, 2026-27 के पुनरीक्षित अनुमान (RE) तथा 2028-29 एवं 2029-30 के रोलिंग बजट की तैयारी के लिए विस्तृत बजट कार्यक्रम और व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस बार बजट प्रक्रिया केवल वार्षिक प्रावधानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘विकसित मध्यप्रदेश-2047’ के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप आगामी तीन वर्षों की वित्तीय आवश्यकताओं, योजनागत प्राथमिकताओं और संसाधनों का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, परिणाम आधारित व्यय और योजनाओं के युक्तियुक्तकरण को इस बजट प्रक्रिया का केंद्रीय आधार बनाया गया है।

7 सितम्बर तक विभागों को भेजने होंगे बजट प्रस्ताव

वित्त विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सभी प्रशासकीय विभागों को 7 सितम्बर 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 के पुनरीक्षित अनुमान, 2027-28 के बजट अनुमान तथा 2028-29 और 2029-30 के रोलिंग बजट के प्रस्ताव आईएफएमआईएस (IFMIS) प्रणाली में दर्ज कर वित्त विभाग को भेजने होंगे। इसके बाद सितंबर से जनवरी 2027 तक विभिन्न स्तरों पर विभागवार बजट चर्चाओं का विस्तृत कार्यक्रम चलेगा, जबकि 31 अक्टूबर 2026 तक नवीन योजनाओं के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। बजट भाषण के लिए विभागीय जानकारी 15 जनवरी 2027 तक उपलब्ध करानी होगी।

‘रोलिंग बजट’ रहेगा वित्तीय प्रबंधन का आधार

स्पष्ट किया गया है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी रोलिंग बजट प्रणाली को जारी रखा जाएगा। वित्तीय वर्ष 2027-28 आगामी दो वर्षों के रोलिंग बजट का आधार वर्ष होगा। विभागों को वर्तमान योजनाओं के साथ प्रस्तावित नई योजनाओं की तीन वर्षीय वित्तीय आवश्यकताओं का यथार्थवादी आकलन करना होगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के विकास लक्ष्यों, राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम तथा ‘विकसित मध्यप्रदेश-2047’ की कार्ययोजना के अनुरूप संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

अब हर बजट प्रस्ताव का देना होगा ठोस औचित्य

इस बार प्रत्येक विभाग को अपने बजट प्रस्ताव का विस्तृत औचित्य प्रस्तुत करना होगा। योजनावार विस्तृत शीर्ष (Detailed Head) तक राशि निर्धारण करते समय गणना की इकाई (Unit of Calculation), संभावित हितग्राहियों की संख्या, पूर्व वर्षों के व्यय, योजना की उपलब्धियों और भविष्य की आवश्यकता का स्पष्ट आधार देना अनिवार्य किया गया है। बजट चर्चा के दौरान सभी संबंधित जानकारियां BEMS Portal पर भी अपलोड करनी होंगी।

अप्रभावी योजनाएं होंगी बंद, समान योजनाओं का होगा विलय

वित्त विभाग ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसी योजनाओं की पहचान करें जो अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं। ऐसी योजनाओं को बंद करने तथा समान उद्देश्य वाली योजनाओं के विलय (Merger) पर विचार किया जाएगा। सभी योजनाओं को प्राथमिकता क्रम में व्यवस्थित करते हुए उपलब्ध संसाधनों का पुनः आवंटन (Re-allocation) किया जाएगा, जिससे सार्वजनिक धन का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

वेतन, महंगाई भत्ता और स्थापना व्यय के लिए स्पष्ट मानक

बजट निर्माण के लिए वेतन मद में प्रत्येक वर्ष 3 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का प्रावधान रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं महंगाई भत्ते के लिए वर्ष 2027-28, 2028-29 और 2029-30 के लिये क्रमशः 78 प्रतिशत, 88 प्रतिशत और 98 प्रतिशत का प्रावधान प्रस्तावित करने को कहा गया है। संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में 4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि, संभावित नई नियुक्तियों, सेवानिवृत्तियों तथा IFMIS आधारित पोस्ट मैपिंग को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।

राजस्व, पूंजीगत व्यय और वर्गीकरण पर रहेगा विशेष फोकस

वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि प्राप्तियों और व्यय का सही वर्गीकरण सुनिश्चित किया जाए। उद्देश्य शीर्ष,विस्तृत शीर्ष , लघु शीर्ष , सेगमेंट कोड तथा राजस्व एवं पूंजीगत व्यय के वर्गीकरण में भारत सरकार के मानकीकृत लेखा ढांचे का पालन अनिवार्य होगा। विशेष रूप से लघु शीर्ष-800 का उपयोग केवल अपरिहार्य स्थिति में ही किया जाएगा।

नई योजनाओं पर सख्ती, पहले प्रशासनिक स्वीकृति जरूरी

नई योजनाओं के प्रस्ताव केवल सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के साथ ही स्वीकार किए जाएंगे। विभागों को नई योजनाओं के उद्देश्य, वित्तीय आवश्यकता, अपेक्षित परिणाम और संसाधनों के स्रोत का स्पष्ट विवरण देना होगा। यदि केंद्र सरकार की नई योजना को राज्य बजट में शामिल करना हो तो केंद्रीय बजट प्रस्तुत होने के तीन दिन के भीतर प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजना होगा।

जेण्डर, चाइल्ड और कृषि बजट पर भी विशेष निगरानी

सभी विभागों को अपने बजट प्रस्तावों में जेण्डर बजट, चाइल्ड बजट, कृषि बजट, अनुसूचित जाति उपयोजना तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना से संबंधित योजनाओं का पृथक विवरण देना होगा। इसके साथ ही ऑफ-बजट संसाधनों, प्रत्यक्ष केंद्रीय सहायता, निगमों एवं प्राधिकरणों के बैंक खातों में उपलब्ध अतिरिक्त राशि तथा राजस्व पर कर छूटों के प्रभाव की जानकारी भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करनी होगी।

समय-सीमा के बाद नहीं होगी IFMIS में प्रविष्टि

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद आईएफएमआईएस में बजट प्रस्तावों की प्रविष्टि स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागाध्यक्ष, बजट नियंत्रण अधिकारी, वित्तीय सलाहकार और संबंधित अधिकारी बजट अनुमानों की शुद्धता और समयबद्ध प्रस्तुति के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। सरकार का उद्देश्य है कि आगामी बजट प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, परिणामोन्मुखी, उत्तरदायी और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो, जिससे मध्यप्रदेश की वित्तीय व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बन सके। 

 

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