सरकारी बाबू ने फर्जी आयुष्मान कार्ड से कराया लाखों का इलाज! जांच में खुली पोल, अब FIR की तैयारी

Edited By Himansh sharma, Updated: 23 Jul, 2026 05:16 PM

ayushman fraud probe confirms charges

मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष्मान भारत योजना के कथित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है।

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष्मान भारत योजना के कथित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में पदस्थ एक कर्मचारी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आयुष्मान कार्ड बनवाकर लाखों रुपये के सरकारी इलाज का लाभ लेने के आरोपों को जांच में प्रथम दृष्टया सही पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है, जिसके बाद अब संबंधित कर्मचारी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने की संभावना बढ़ गई है।

शिकायत के बाद शुरू हुई प्रशासनिक जांच

पूरा मामला उस समय सामने आया जब जबलपुर निवासी सुमित कुमार ने 7 जुलाई 2026 को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से लिखित शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शासकीय कला निकेतन पॉलिटेक्निक कॉलेज में कार्यरत यूडीसी सुनील कुमार जाट ने अपनी वास्तविक पारिवारिक जानकारी छिपाकर खुद को अविवाहित दर्शाया और फर्जी तरीके से आयुष्मान योजना का लाभ प्राप्त किया।

दो समग्र आईडी बनाकर लाभ लेने का आरोप

शिकायत के अनुसार, कर्मचारी ने दो अलग-अलग समग्र आईडी तैयार कराईं। एक आईडी में उनका वास्तविक परिवार दर्ज था, जबकि दूसरी समग्र आईडी में खुद को किसी पात्र परिवार का दत्तक सदस्य दर्शाकर नाम जुड़वाया गया। इसी दूसरी आईडी के आधार पर आयुष्मान कार्ड जारी कराया गया और सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ लिया गया।

डायलिसिस समेत महंगे इलाज का उठाया लाभ

जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि वर्ष 2023 से एक निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के जरिए डायलिसिस सहित अन्य चिकित्सा सेवाओं का लाभ लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि यदि आरोप पूरी तरह सही साबित होते हैं तो इससे शासन को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में शिकायत सही

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नवीन कोठारी ने पुष्टि की कि आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों द्वारा की गई जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। जांच में समग्र आईडी में कथित हेरफेर और पात्रता संबंधी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। पूरी जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए कलेक्टर कार्यालय को भेज दी गई है।

अब एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की तैयारी

शिकायतकर्ता ने दोषी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कराने पर निर्णय लिया जा सकता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कर्मचारी को विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

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