Edited By Himansh sharma, Updated: 11 Jul, 2026 06:55 PM

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में मचा राजनीतिक घमासान अब राष्ट्रीय स्तर की सियासत का मुद्दा बन गया है।
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में मचा राजनीतिक घमासान अब राष्ट्रीय स्तर की सियासत का मुद्दा बन गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब कांग्रेस के लिए भी बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर सवाल उठाए हैं।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि "नरोत्तम मिश्रा की टिकट क्या कटी, भाजपा की पोल खुल गई। जो पार्टी हर दिन दूसरों को अनुशासन और उच्च चरित्र का पाठ पढ़ाती है, वही आज अपने ही कार्यकर्ताओं के विरोध और हंगामे का सामना कर रही है। दूसरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत। उनका यह बयान सामने आते ही दतिया का राजनीतिक घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया।
दरअसल, भाजपा ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह संगठन से जुड़े नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवार की घोषणा होते ही मिश्रा समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। विरोध इतना बढ़ गया कि हजारों समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर प्रदर्शन करते हुए कई घंटों तक यातायात बाधित कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। पथराव की घटनाओं में दतिया के पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
राजनीतिक विरोध का असर संगठन पर भी दिखाई दिया। टिकट वितरण से नाराज कई स्थानीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने अपने पदों से इस्तीफे की घोषणा कर दी। इससे भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. नरोत्तम मिश्रा को अंतिम समय तक टिकट मिलने की उम्मीद थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अंतिम निर्णय में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
उधर, आशुतोष तिवारी ने उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और सभी वरिष्ठ नेताओं का सहयोग मिलेगा।
दूसरी ओर, मिश्रा समर्थकों का कहना है कि यदि उनके नेता को टिकट नहीं दिया गया तो विरोध जारी रहेगा। कुछ समर्थकों ने पार्टी छोड़ने तक की चेतावनी भी दी है, जिससे दतिया की राजनीतिक लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था। बाद में अदालत से सजा मिलने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई, जिसके बाद दतिया सीट पर उपचुनाव की नौबत आई। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा अपने भीतर के असंतोष को कितनी जल्दी शांत कर पाती है और कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी मुद्दा बनाकर कितना राजनीतिक लाभ उठा पाती है।