Edited By Desh Raj, Updated: 09 Jul, 2026 05:11 PM

दतिया विधानसभा उपचुनाव की नामांकन प्रक्रिया के चौथे दिन गुरुवार को आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रत्याशी दामोदर सिंह यादव ने अपने भाई केशव यादव के साथ कलेक्ट्रेट स्थित तहसील कार्यालय पहुंचकर नामांकन पत्र जमा किया।
(दतिया):दतिया विधानसभा उपचुनाव की नामांकन प्रक्रिया के चौथे दिन गुरुवार को आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रत्याशी दामोदर सिंह यादव ने अपने भाई केशव यादव के साथ कलेक्ट्रेट स्थित तहसील कार्यालय पहुंचकर नामांकन पत्र जमा किया। इसके साथ ही उपचुनाव का पहला विधिवत नामांकन दाखिल हो गया। दामोदर यादव इस चुनाव में 'केतली' चुनाव चिन्ह पर अपनी किस्मत आजमाएंगे।
भाजपा के समर्थन में आया क्षत्रिय समाज
इधर दामोदर यादव ने नामांकन भरा उधर जिले में एक बड़ा घटनाक्रम हो गया। दतिया में क्षत्रिय समाज ने एक बड़ी बैठक आयोजित की। इस बैठक में समाज के लोगों ने बड़ा फैसला करते हुए एक सुर में उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया। क्षत्रिय समाज का कहना है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में समाज ने भाजपा का विरोध किया था, लेकिन इस बार वे अपनी भूल सुधार करेगें और बीजेपी को जिताने के लिए काम करेंगे।
इस मौके पर क्षत्रिय समाज के लोगों ने नाम लिए बिना पूर्व दतिया विधायक पर सीधा निशाना साधा। समाज के लोगों ने कहा कि जिसे हमने चुनकर भेजा था, उसने दतिया में विकास नहीं कराया। पिछले ढाई साल में दतिया में सिर्फ विनाश हुआ है। इसलिए इस बार भाजपा का समर्थन करने का निर्णय लिया गया है।
क्षत्रिय समाज ने ऐलान किया है कि वे दतिया की बदहाली को दूर करने के लिए पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का पूर्ण समर्थन करेंगे। लिहाजा आजाद समाज पार्टी की एंट्री और क्षत्रिय समाज के समर्थन ने दतिया उपचुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
दामोदर यादव का नामांकन
दतिया उपचुनाव में आज उस समय नया मोड़ आ गया जब आजाद समाज पार्टी (ASP) की आधिकारिक तौर पर एंट्री हो गई। आज आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव ने भी भारी लाव-लश्कर और समर्थकों के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। आजाद समाज पार्टी की इस एंट्री से दतिया में भाजपा और कांग्रेस का पारंपरिक चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है।
लिहाजा मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा गरमाता जा रहा है। एक तरफ जहां चुनावी मैदान में तीसरे मोर्चे की एंट्री से मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन गए हैं, वहीं दूसरी तरफ जातिगत समीकरणों को साधने की होड़ भी तेज हो गई है।