Edited By Himansh sharma, Updated: 11 Jul, 2026 01:11 PM

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद जिस राजनीतिक असंतोष ने जोर पकड़ा था,
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद जिस राजनीतिक असंतोष ने जोर पकड़ा था, अब वह एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। टिकट बदलने के फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में डॉ. मिश्रा के समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर संगठन के सामने असहज स्थिति खड़ी कर दी थी। लेकिन अब स्वयं डॉ. मिश्रा ने पार्टी के फैसले को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर सियासी संदेश स्पष्ट कर दिया है।
मीडिया से बातचीत में नरोत्तम मिश्रा ने दो टूक कहा कि यह पार्टी का निर्णय है। मैंने कल भी यही कहा था और आज भी यही कह रहा हूं। पार्टी के मंच पर अपनी बात कही जाती है, इस तरह नहीं। उनके इस बयान को संगठन के प्रति अनुशासन और प्रतिबद्धता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. मिश्रा के रुख के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन भाजपा कार्यकर्ताओं को लेकर खड़ा हो गया है जिन्होंने विरोध स्वरूप अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। जब नेता स्वयं संगठन के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है, तब क्या समर्थक भी अपने कदम पीछे खींचेंगे? क्या वे पार्टी में वापसी का रास्ता चुनेंगे या संगठन उनके इस्तीफों को स्वीकार कर नई नियुक्तियों की दिशा में आगे बढ़ेगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली पार्टी मानी जाती है। ऐसे में आने वाले दिनों में संगठन का रुख यह तय करेगा कि विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश होगी या फिर संगठनात्मक बदलाव का रास्ता अपनाया जाएगा। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
दतिया उपचुनाव के बीच यह मामला अब केवल टिकट बदलने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा के संगठनात्मक संतुलन और कार्यकर्ताओं की निष्ठा की भी परीक्षा बन गया है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अपील और उनके रुख के बाद संगठन तथा नाराज कार्यकर्ता अगला कदम क्या उठाते हैं।