Edited By Himansh sharma, Updated: 11 Jul, 2026 11:29 AM

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा फैसला लिया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा फैसला लिया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी ने लंबे समय से चुनावी तैयारियों में जुटे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार चुनावी रणनीति पारंपरिक समीकरणों से आगे बढ़कर तय की गई है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा पिछले कई महीनों से दतिया में लगातार सक्रिय थे। संगठन से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच उनकी बैठकों और जनसंपर्क अभियानों को देखकर यह लगभग तय माना जा रहा था कि पार्टी उन्हीं पर दांव लगाएगी। प्रदेश भाजपा ने उनका नाम केंद्रीय नेतृत्व तक भी भेजा था, लेकिन अंतिम क्षणों में तस्वीर बदल गई।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली स्तर पर मिले राजनीतिक फीडबैक, सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की रणनीति तथा उपचुनाव के व्यापक राजनीतिक संदेश को ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व ने उम्मीदवार बदलने का निर्णय लिया। इसी रणनीति के तहत आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा गया।
राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में गिना जाता है। वे कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी के रणनीतिकार के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे नेता का टिकट अंतिम समय में कटना यह संकेत देता है कि भाजपा इस उपचुनाव को केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि व्यापक संगठनात्मक और राजनीतिक संदेश के रूप में देख रही है।
अब दतिया का उपचुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है। पार्टी के इस फैसले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में प्रदेश भाजपा की राजनीति में नए नेतृत्व और नई रणनीति की भूमिका कितनी प्रभावी होने वाली है। फिलहाल, आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी ने चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है, जबकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो गया है।