Edited By Himansh sharma, Updated: 08 Apr, 2026 12:40 PM

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रेत माफियाओं का खौफ एक बार फिर खून से लिखी गई कहानी बन गया।
मुरैना (रोहित शर्मा): मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रेत माफियाओं का खौफ एक बार फिर खून से लिखी गई कहानी बन गया। दिमनी थाना क्षेत्र के रामपुर तिराहे पर गश्त कर रहे वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश कर रहे वनकर्मी को माफियाओं ने जानबूझकर कुचल दिया और मौके से फरार हो गए।
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून को खुली चुनौती है।
सूत्रों के मुताबिक, चंबल नदी से रेत भरकर लौट रहे माफियाओं को जब वन विभाग की टीम ने रोका, तो उन्होंने रुकने के बजाय ट्रैक्टर सीधे हरिकेश गुर्जर पर चढ़ा दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।
सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, वहीं अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक आरोपी पकड़ से बाहर हैं।
मुरैना और चंबल अंचल में रेत माफियाओं का आतंक कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार पुलिस और वन विभाग की टीमों पर हमले हो चुके हैं। साल 2015 में एक आईपीएस अधिकारी को भी इसी तरह ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी हालात में खास बदलाव नहीं आया।
इस घटना के बाद परिजनों में मातम और गुस्सा दोनों है। स्थानीय लोग सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं वन विभाग के कर्मचारियों में भी डर का माहौल है.. क्योंकि सवाल सिर्फ एक जान का नहीं, बल्कि हर उस कर्मचारी की सुरक्षा का है जो ड्यूटी पर अपनी जान जोखिम में डालता है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है..
आखिर कब तक रेत माफिया कानून को यूं ही कुचलते रहेंगे? और कब प्रशासन इन पर लगाम कसने में कामयाब होगा?