Edited By meena, Updated: 11 May, 2026 06:19 PM

मध्य प्रदेश में बिना समुचित जांच के अनुसूचित जाति और जनजाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के मामलों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर एसडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारी कथित भ्रष्टाचार और लेनदेन...
भोपाल (इजहार खान) : मध्य प्रदेश में बिना समुचित जांच के अनुसूचित जाति और जनजाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के मामलों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर एसडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारी कथित भ्रष्टाचार और लेनदेन के जरिए अपात्र लोगों को एससी-एसटी प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं, जिससे वास्तविक पात्र वर्ग के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने सतना जिले के एक मामले को उठाते हुए तत्कालीन एसडीएम राजेश शाही पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप लगाया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को शिकायत भेजकर तत्कालीन एसडीएम राजेश शाही के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गलत और अनैतिक तरीके से जारी एससी का एक जाति प्रमाण पत्र वर्ष 2021 में वंदना बागरी के नाम से फर्जी पाए जाने पर निरस्त कर दिया गया। वंदना बागरी नाम का जाति प्रमाणपत्र कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया था। अहिरवार ने इसे जालसाजी, भ्रष्टाचार और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला बताया है।
प्रदीप अहिरवार ने कहा कि विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के सतना, रीवा, पन्ना, छतरपुर, सिवनी और सागर सहित कई जिलों में पाए जाने वाले बागरी समुदाय को राजपूत है, जबकि मालवा-निमाड़ क्षेत्र में “बागरी” नाम से अनुसूचित जाति वर्ग भी मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति नाम की समानता का फायदा उठाकर कुछ लोग प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ कर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं।
शिकायत में कहा गया है कि तत्कालीन एसडीएम ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी प्रमाण पत्र जारी किया, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही SC/ST एक्ट की धाराएं भी लागू होने की बात कही गई है।
प्रदीप अहिरवार ने मांग की है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर दोषी अधिकारी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा सतना में उनके कार्यकाल के दौरान जारी सभी संदिग्ध जाति प्रमाण पत्रों की फोरेंसिक जांच कराने, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ रोकने तथा कथित अवैध संपत्ति की जांच EOW से कराने की मांग भी की गई है। शिकायत के साथ निरस्त जाति प्रमाण पत्र की प्रति को साक्ष्य के रूप में संलग्न किया गया है।