ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, CM मोहन ने पत्नी संग भूमि पूजन कर रखी नींव

Edited By Vandana Khosla, Updated: 27 Aug, 2026 11:27 AM

foundation stone laid for the panchayatana temple at omkareshwar s ekatma dham

खंडवा (मुश्ताक मंसूरी ): मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बृहस्पतिवार को खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में विकसित किए जा रहे 'एकात्म धाम' में पंचायतन मंदिर की नींव रखी। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग वाली धार्मिक नगरी का यह स्थल देश की...

खंडवा (मुश्ताक मंसूरी ): मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बृहस्पतिवार को खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में विकसित किए जा रहे 'एकात्म धाम' में पंचायतन मंदिर की नींव रखी। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग वाली धार्मिक नगरी का यह स्थल देश की सनातन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकात्मता का केंद्र बनेगा। सीएम मोहन यादव ने साधु-संतों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 45 पवित्र शिलाओं का अपनी पत्नी के साथ पूजन किया और पंचायतन मंदिर निर्माण की औपचारिक शुरुआत की। स्थापत्य की पारंपरिक नागर शैली में बनाए जा रहे इस मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा, जबकि इसके चारों कोनों पर भगवान विष्णु, भगवान सूर्य, भगवान गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय होंगे।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 'पंचायतन पूजन' की परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित किया था और 'एकात्म धाम' का पंचायतन मंदिर इस महान परंपरा को आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में आज कई चुनौतियां और अंतर्विरोध हैं। तमाम आसुरी शक्तियां हमारे मार्ग के पग-पग पर कठिनाइयां उत्पन्न कर रही हैं। भगवान के आशीर्वाद से ये शक्तियां पराजित होंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ मेले से पहले राज्य में 'एकात्म यात्रा' निकाली जाएगी जिसका समापन मेले के दौरान होगा। यादव ने कहा कि यह यात्रा देश-दुनिया में ज्ञान की भारतीय विरासत, संत परंपरा और एकात्म दर्शन का संदेश पहुंचाएगी।

ऐसी मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने सदियों पहले ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर गुरु गोविंदपादाचार्य से शिक्षा-दीक्षा ग्रहण की थी। 'एकात्म धाम', ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर राज्य सरकार का विकसित किया जा रहा आध्यात्मिक-सांस्कृतिक परिसर है। इसका केंद्रबिंदु शंकराचार्य की एकात्म दर्शन की वह अवधारणा है जो विविधता में एकता और सभी प्राणियों में एक ही परम चेतना के अस्तित्व का संदेश देती है।

 
 

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