Edited By Desh Raj, Updated: 20 Apr, 2026 05:42 PM

रिटायरमेंट लाभों के भुगतान में देरी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला दिया जो काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शासन को साफ निर्देश दिए हैं कि 60 दिन के अंदर ही पूरा भुगतान किया जाए।
(ग्वालियर): रिटायरमेंट लाभों के भुगतान में देरी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला दिया जो काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शासन को साफ निर्देश दिए हैं कि 60 दिन के अंदर ही पूरा भुगतान किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि देरी की स्थिति में 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसे एक बड़ा फैसला माना जा रहा है ।
मामला उमेश कुमार गुप्ता की रिट अपील से संबंधित
आपको बता देते हैं कि ये मामला उमेश कुमार गुप्ता की रिट अपील से संबंधित है। इस मामले में अपीलकर्ता को 29 जुलाई 2021 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। हालांकि आदेश को चुनौती देने पर पूर्व में कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया था।
31 जुलाई 2023 तक सेवा में मानते हुए सभी रिटायरमेंट लाभ देने के निर्देश दिए थे लेकिन इसके बाद भी अपीलकर्ता ने बकाया राशि पर ब्याज नहीं दिए जाने को लेकर फिर अपील दायर की। अपीलकर्ता ने कहा कि ये कार्रवाई नियमों के विपरीत थी, लिहाजा उन्हें ब्याज मिलना चाहिए जबकि राज्य शासन ने इसका विरोध किया था।
कोर्ट ने इसकी सुनवाई की और बाद में माना कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश वैधानिक प्रावधानों के तहत पारित हुआ था और वह न्यायालय में विचाराधीन रहा लिहाजा ऐसे में उस अवधि के दौरान ब्याज देने का आधार नहीं बनता है।
हालांकि जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने यह भी कहा कि अब आदेश के पालन में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी । कोर्ट ने साफ कहा कि निर्धारित 60 दिन की अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो देरी की अवधि के लिए 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना भी होगा। इस तरह से अपील का कोर्ट ने निराकरण करके अपीलकर्ता को राहत दे दी।
वहीं दूसरे ओर पिछले दिनों हाइकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती दिखाते हुए दोषी पाए गए एक सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन पूरी तरह बंद करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा है कि भ्रष्टाचार जैसे संगीन अपराधों में दया या सहानुभूति की कोई जगह नहीं है और ऐसी सख्त सजा ही ठीक है।