किसान आंदोलन: संकट बड़ा था, पर समाधान उससे बड़ा! अच्छे अच्छों पर भारी साबित हुई मोहन यादव प्रशासनिक क्षमता

Edited By Desh Raj, Updated: 30 Jul, 2026 02:13 PM

mohan yadav s administrative prowess put to the test

मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के बड़ा होने से पहले ही शांत कर लिया गया है। मोहन सरकार ने परिपक्वता, सूझबूझ और अपनी उच्च राजनीतिक सोच को दर्शाते हुए किसानों की मांगों पर गौर कर लिया है।

(डेस्क): मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के बड़ा होने से पहले ही शांत कर लिया गया है। मोहन सरकार ने परिपक्वता, सूझबूझ और अपनी उच्च राजनीतिक सोच को दर्शाते हुए किसानों की मांगों पर गौर कर लिया है। सीएम मोहन ने किसानों के जज्बातों को समझते हुए उनके साथ चलने का फैसला किया है। किसानों की प्रमुख मांगों को मानकर मोहन सरकार ने ये संदेश दे दिया है कि वो किसानों के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही मोहन सरकार ने दिखा दिया कि जहां राजनीति में बढ़ती उम्र को परिपक्वता का निशानी समझा जाता है वहीं सीएम मोहन यादव एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह प्रदेश कि समस्याओं से पार पा रहे हैं।

मोहन यादव ने मनवाया अपने कौशल का लोहा

किसानों के बढ़ते आक्रोश औऱ भोपाल में बढ़ती संख्या के बीच सीएम मोहन ने मौके को देखते हुए मोर्चा संभाला। सरकार ने बुधवार को आंदोलनकारी किसानों से बातचीत के बाद राज्य के मूंग उत्पादक पात्र किसानों की उपज का 60 प्रतिशत उपार्जन करने की घोषणा कर दी।  स्लॉट बुकिंग को 10 अगस्त तक कर दिया । इसके साथ ही सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी। ये कुछ ऐसे फैसले मोहन सरकार ने लिए जिन्होंने किसानों को शांत किया । ये निर्णय ऐसा था कि कुछ देर बाद मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही दूरी पर डटे अन्नदाताओं ने अपना प्रदर्शन खत्म करने की घोषणा की‌।

मोहन से मौके की नजाकत को देखते हुए लिया बड़ा फैसला

किसानों की मांगों के मद्देनजर बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के प्रयास के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चार सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की थी। मोहन यादव ने साफ कह दिया था कि सरकार हमेशा सकारात्मक सुझावों के साथ किसानों के साथ खड़ी रही है। दोनों पक्षों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को परेशानी न हो।

मोहन ने समझा किसानों का दर्द

मोहन सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्लॉट बुकिंग की अवधि 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया । अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की गई। मोहन ने साफ कर दिया है कि  मध्यप्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित के लिए खड़ी है।

समय के साथ धुरंधर और परिपक्व होते जा रहे मोहन यादव

लिहाजा कुल मिलाकर  किसानों के इस आंदोलन और आक्रोश को महज 24 घंटे में शांत करना और किसान हित में फैसले लेकर मोहन यादव ने दिखा दिया कि राजनीति में ऐसे मामलों को कैसे संभाला जाता है। मोहन ने बताया कि ऐसी स्थिति को संभालने के लिए किस कौशल की जरुरत होती है। कहा जा सकता है कि मोहन जैसे मैनेजर कोई नहीं है। बढ़ती उम्र के साथ राजनीति में अनुभव और परिपक्वता आती है लेकिन मोहन समय से पहले ही अपने जौहर दिखा रहे हैं। खैर किसानों के गुस्से को तसल्ली एवं संतुष्टि में बदलकर मोहन यादव ने साबित कर दिया कि प्रदेश को विकास और तरक्की की राह पर ले जाने के लिए किस कदर प्रतिबद्ध हैं।

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