Edited By Himansh sharma, Updated: 30 Jan, 2026 01:29 PM

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश, प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की बैठने की व्यवस्था को लेकर फरवरी माह का विस्तृत रोस्टर जारी कर दिया है।
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश, प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की बैठने की व्यवस्था को लेकर फरवरी माह का विस्तृत रोस्टर जारी कर दिया है। इस रोस्टर के तहत महीने भर में कुल 20 कार्यदिवसों में मंत्री प्रदेश कार्यालय में मौजूद रहकर पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे।
खास बात यह है कि इस बार केवल मंत्री ही नहीं, बल्कि उनके साथ पार्टी के पदाधिकारी भी संयुक्त रूप से सुनवाई में शामिल रहेंगे। यह व्यवस्था सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच लागू रहेगी। हर दिन अलग-अलग विभागों के मंत्री कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे।
पहले सप्ताह में डिप्टी सीएम से लेकर वरिष्ठ मंत्री रहेंगे मौजूद
फरवरी के पहले सप्ताह में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, कैलाश विजयवर्गीय, विश्वास सारंग और विजय शाह जैसे वरिष्ठ नेता प्रदेश कार्यालय में सुनवाई करेंगे। इनके साथ तकनीकी शिक्षा, नगरीय प्रशासन, खेल, सहकारिता और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मंत्री व पार्टी पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
दूसरे सप्ताह में पंचायत, शिक्षा और राजस्व से जुड़े मंत्री करेंगे सुनवाई
दूसरे सप्ताह में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला के अलावा पंचायत, स्कूल शिक्षा, परिवहन, राजस्व, पर्यटन और पीएचई विभाग के मंत्री कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे। इस दौरान संगठनात्मक पदाधिकारी भी समन्वय की भूमिका निभाएंगे।
तीसरे सप्ताह में महिला-बाल विकास और कृषि पर फोकस
तीसरे सप्ताह में कृषि, महिला एवं बाल विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जल संसाधन और उद्यानिकी विभाग के मंत्री प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे। इस चरण में संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।
चौथे सप्ताह में ऊर्जा, उच्च शिक्षा और एमएसएमई मंत्री होंगे मौजूद
फरवरी के अंतिम सप्ताह में ऊर्जा, नवकरणीय ऊर्जा, एमएसएमई, उच्च शिक्षा और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के मंत्री कार्यालय में उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सुझावों पर चर्चा करेंगे।
संगठन और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की पहल
बीजेपी का यह कदम संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ ग्राउंड लेवल पर कार्यकर्ताओं की आवाज सीधे मंत्रियों तक पहुंचाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस तरह की नियमित सुनवाई से नीतिगत फैसलों में जमीनी हकीकत को शामिल किया जा सकेगा।