संसदीय समिति की पुदुचेरी यात्रा, सांसद बृजमोहन ने महिला सशक्तिकरण और युवाओं के विकास पर की उच्च स्तरीय समीक्षा

Edited By Desh Raj, Updated: 15 Jul, 2026 11:07 PM

mp brijmohan conducts high level review of women empowerment development

शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्ययन यात्रा के दूसरे दिन की पुदुचेरी में बुधवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

पुदुचेरी/रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्ययन यात्रा के दूसरे दिन की पुदुचेरी में बुधवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। समिति के सदस्य और रायपुर (छत्तीसगढ़) के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पुदुचेरी सरकार, भारत सरकार के मंत्रालयों और देश के बड़े सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों (PSUs) व बैंकों के साथ महिला सशक्तिकरण और बाल विकास की दिशा में चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।  इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का पुष्पगुच्छ भेंट कर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

पुदुचेरी की अनूठी पहलों की समीक्षा और छत्तीसगढ़ का संदर्भ

बैठक के दौरान पुडुचेरी सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही अनूठी पहलों की समीक्षा की गई। इस पर चर्चा करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, "महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही किसी भी विकसित समाज की पहली सीढ़ी है। जिस तरह छत्तीसगढ़ में 'महतारी वंदन योजना' के माध्यम से लाखों महिलाओं को हर महीने सीधे वित्तीय सहायता देकर सशक्त और स्वावलंबी बनाया जा रहा है, ठीक उसी तरह पुदुचेरी सरकार की भी अभिनव योजनाएं सराहनीय हैं। हमारा लक्ष्य पूरे देश की महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सुदृढ़ आर्थिक तंत्र तैयार करना है।"

महिला सशक्तिकरण के लिए CSR फंड का सही उपयोग हो सांसद बृजमोहन

संसदीय समिति ने पुदुचेरी और तमिलनाडु के क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों की भी कड़ी समीक्षा की। अग्रवाल ने सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों के प्रतिनिधियों को सुझाव देते हुए कहा कि सीएसआर (CSR) फंड का एक बड़ा और प्रभावी हिस्सा महिलाओं के कौशल विकास (Skill Development), बाल शिक्षा, कुपोषण मुक्ति और महिला उद्यमियों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने में खर्च होना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बैंक और सार्वजनिक उपक्रम केवल कागजी कोरम पूरा न करें, बल्कि जमीन पर उनका काम दिखना चाहिए ताकि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।

इस अध्ययन यात्रा और बैठक के निष्कर्षों को संसदीय समिति अपनी आगामी रिपोर्ट के माध्यम से संसद के पटल पर रखेगी, जिससे देश में महिला, बाल और युवा कल्याण की नीतियों को और अधिक व्यावहारिक व मजबूत बनाया जा सके।

बैठक में समिति अध्यक्ष मुकुल वासनिक, सदस्यगण टी सुमति, रेखा शर्मा, स्वाति मालीवाल, शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया, जितेंद्र कुमार दोहरे, कामाख्या प्रसाद तासा, जियाउर रहमान, कांस्टैंडाइन रविंद्रन, भीम सिंह, सिकंदर कुमार, दर्शन सिंह चौधरी के साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग (पुडुचेरी सरकार), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (भारत सरकार) के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक (इंडियन बैंक, केनरा बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक) और सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उपक्रम (एनएलसी इंडिया लिमिटेड, भेल - BHEL और चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के प्रतिनिधि शामिल रहे।

श्री अरबिंदो आश्रम में दी श्रद्धांजलि,श्री अरबिंदो अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा केंद्र का भ्रमण

 

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संसदीय समिति की पुदुचेरी यात्रा: श्री अरबिंदो की समाधि पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने किया नमन

समीक्षा बैठक से पूर्व, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसदीय समिति के अध्यक्ष मुकुल वासनिक एवं अन्य साथी सदस्यों के साथ सुप्रसिद्ध श्री अरबिंदो आश्रम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने महान दार्शनिक, क्रांतिकारी, आध्यात्मिक गुरु और आधुनिक भारत के मार्गदर्शक श्री अरबिंदो (अरविंद घोष) की समाधि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके साथ ही समिति के सदस्यों ने 'श्री अरबिंदो अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा केंद्र' (SAICE) का भी अवलोकन किया, जो समग्र और मूल्य-आधारित शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया भर में एक अनूठा उदाहरण है।

इस अवसर पर श्री अरबिंदो के विचारों को याद करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, "श्री अरबिंदो केवल एक स्वतंत्रता सेनानी या योगी नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे महान शिक्षाविद् और द्रष्टा थे जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए बौद्धिक और आध्यात्मिक चेतना को जगाने का संदेश दिया। आज जब हमारी संसदीय समिति शिक्षा, युवा और खेल संबंधी नीतियों की समीक्षा कर रही है, तो श्री अरबिंदो का यह शिक्षा केंद्र हमें याद दिलाता है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल साक्षरता नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छुपी दिव्य शक्तियों और उसकी आंतरिक क्षमता का पूर्ण विकास करना है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्र-भक्त नागरिक बना सकते हैं।"

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