MP कांग्रेस में महाघमासान! स्लीपर सेल, मारपीट और बगावत से मचा सियासी भूचाल

Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Jul, 2026 03:18 PM

mp congress hit by sleeper cell row and infighting

मध्य प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों सियासी उथल-पुथल चरम पर है। बीते कुछ दिनों में नेताओं के अलग-अलग बयान, स्लीपर सेल के आरोप, कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और सार्वजनिक नाराजगी ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को उजागर कर दिया है।

भोपाल। (इजहार खान): मध्य प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों सियासी उथल-पुथल चरम पर है। बीते कुछ दिनों में नेताओं के अलग-अलग बयान, स्लीपर सेल के आरोप, कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और सार्वजनिक नाराजगी ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को उजागर कर दिया है। हालांकि वरिष्ठ नेता लगातार एकजुटता का दावा कर रहे हैं, लेकिन घटनाक्रम कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार के संरक्षण में करीब 500 करोड़ रुपये की जमीन मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई और पूरे मामले की जांच की मांग उठाई।

लेकिन पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर एक राय नहीं दिखी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उनके इस बयान को कांग्रेस के आरोपों से अलग रुख और मुख्यमंत्री को राहत देने वाले बयान के तौर पर देखा गया।

इसके बाद कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने देवास में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में संगठन के भीतर मौजूद कथित “स्लीपर सेल” को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें संगठन से बाहर करना जरूरी है। इस बयान के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल और तेज हो गई।

इसी दौरान भोपाल में युवा कांग्रेस की बैठक में प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया। लात-घूंसे चलने की स्थिति बनने पर प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया को हस्तक्षेप कर मामला शांत कराना पड़ा। घटना ने संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए।

इसके बाद कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पार्टी के भीतर भाजपा के स्लीपर सेल सक्रिय हैं। उनके बयान को राजनीतिक हलकों में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से जोड़कर देखा गया, हालांकि मसूद ने किसी नेता का नाम लेने से परहेज किया।

उधर, सीधी जिले में भी कांग्रेस के भीतर विवाद हिंसक हो गया। एक सोशल मीडिया पोस्ट से नाराज कार्यकर्ताओं ने जिला प्रभारी के साथ मारपीट कर दी। घटना के बाद वरिष्ठ नेता अजय सिंह राहुल भैया ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

लगातार बढ़ते विवादों और अफवाहों के बीच दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर पार्टी में किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया। दोनों नेताओं ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और विपक्ष को कमजोर दिखाने के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है।

हालांकि, इसके बाद पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए संगठन के भीतर साजिश की बात कही। उन्होंने लिखा कि कुछ नेता जानबूझकर कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने का काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक एकजुटता और गुटीय राजनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी हाईकमान इन विवादों को कैसे सुलझाता है और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

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