Edited By Himansh sharma, Updated: 09 Jan, 2026 06:24 PM
मध्य प्रदेश के भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के तबादलों को लेकर ऐतिहासिक और सख्त फैसला लिया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के तबादलों को लेकर ऐतिहासिक और सख्त फैसला लिया है। अब किसी भी सरकारी कर्मचारी का तबादला प्रस्तावित होते ही तीन दिन के भीतर आदेश जारी करना जरूरी होगा।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय की A+ नोटशीट व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब विभाग प्रमुख, अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव को हर हाल में तय समय-सीमा का पालन करना होगा।
नई व्यवस्था में क्या-क्या बदला?
अब तक तबादले के मामलों में अक्सर महीनों तक फाइलें अटकी रहती थीं।
लेकिन अब—
तबादले का प्रस्ताव आते ही 3 दिन में आदेश जारी करना अनिवार्य
तय समय में आदेश नहीं निकला तो सीधे कारण बताना होगा
देरी की पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजनी होगी
यानी अब तबादले में टालमटोल की कोई गुंजाइश नहीं।
तबादला नीति में दी गई छूट
सरकार ने तबादला नीति के कई प्रावधानों को फिलहाल शिथिल कर दिया है। अब पहले तबादला आदेश जारी किया जाएगा, और उसके बाद अनुमोदन लिया जा सकेगा।
इसका मकसद साफ है -
फैसले में तेजी और प्रशासनिक पारदर्शिता।
ACS और PS पर बढ़ी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत A+ नोटशीट का समय-सीमा में पालन कराना अब अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव की सीधी जिम्मेदारी होगी।
अगर मंत्री या विधायक से जुड़े मामलों में भी देरी होती है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी।
मंत्री-विधायकों की शिकायत के बाद आया फैसला
सूत्रों के अनुसार,
तबादलों में हो रही देरी को लेकर मंत्री और विधायकों ने सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी नाराजगी पहुंचाई थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरी प्रक्रिया को तेज और जवाबदेह बनाने का फैसला लिया।
कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?
तबादले में अनिश्चितता खत्म
फाइलों में अटकने का खेल बंद
समय पर आदेश और स्पष्ट जवाबदेही
सरकारी कर्मचारियों के लिए यह फैसला बड़ा राहत देने वाला माना जा रहा है।