Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Mar, 2026 12:07 PM

मध्यप्रदेश सरकार पर कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार पर कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने मार्च में ही सरकार ने चौथी बार कर्ज उठाते हुए 2,500 करोड़ रुपए और उधार ले लिया है। इसके साथ ही राज्य पर कुल कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ता दिख रहा है। जानकारी के अनुसार, सरकार ने शुक्रवार को दो हिस्सों में यह कर्ज लिया—पहला 1,500 करोड़ रुपए का 14 साल के लिए और दूसरा 1,000 करोड़ रुपए का 24 साल की अवधि के लिए। इस कर्ज की राशि 30 मार्च को सरकार के खाते में आ जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया Reserve Bank of India के माध्यम से मुंबई में पूरी की गई।
मार्च में ही 18,700 करोड़ का कर्ज
अगर केवल मार्च महीने की बात करें तो सरकार ने अब तक कुल 18,700 करोड़ रुपए का कर्ज उठा लिया है।
3 मार्च: 6,300 करोड़
10 मार्च: 5,800 करोड़
17 मार्च: 4,100 करोड़
अब: 2,500 करोड़
इस तरह महीने भर में लगातार कर्ज लेने का सिलसिला जारी रहा।
योजनाओं और भत्तों के लिए बढ़ी जरूरत
सरकार को यह कर्ज मुख्य रूप से अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और खर्चों को पूरा करने के लिए लेना पड़ रहा है। खासतौर पर लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को राशि वितरण और कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) देने के कारण वित्तीय दबाव बढ़ा है।
सालभर में 91,500 करोड़ का कर्ज
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज करीब 91,500 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।
नीति आयोग ने जताई चिंता
राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर NITI Aayog भी चिंता जता चुका है। हाल ही में जारी फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के बढ़ते कर्ज और ब्याज भुगतान को लेकर गंभीर संकेत दिए गए हैं।
पूंजीगत खर्च का दावा
वित्त विभाग के मुताबिक, लिया गया कर्ज पूंजीगत व्यय और विकास परियोजनाओं में लगाया जाएगा, जिससे भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश सरकार जहां एक ओर योजनाओं और विकास कार्यों को जारी रखने के लिए कर्ज पर निर्भर होती जा रही है, वहीं बढ़ता कर्ज और ब्याज का बोझ आने वाले समय में वित्तीय संतुलन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।