Edited By Himansh sharma, Updated: 27 Jun, 2026 05:12 PM

मध्य प्रदेश के करीब 4.5 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है।
भोपाल। मध्य प्रदेश के करीब 4.5 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। वर्षों से कानूनी विवाद में उलझे प्रमोशन के मामले को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में 29 जून को 20 प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रमोशन प्रक्रिया से जुड़े सभी आवश्यक बिंदुओं पर अंतिम रणनीति तैयार की जाएगी।
2016 से थमी प्रक्रिया को फिर रफ्तार देने की कोशिश
मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 से आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण पदोन्नति प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है। इस बीच सरकार ने जून 2025 में नए पदोन्नति नियम लागू किए, लेकिन उन्हें अदालत में चुनौती मिलने से मामला फिर कानूनी दायरे में पहुंच गया। हालांकि, हालिया कानूनी सलाह के बाद सरकार का मानना है कि नए नियमों पर किसी प्रकार का स्पष्ट स्थगन आदेश नहीं होने के कारण प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
20 विभागों से मांगा गया पूरा ब्यौरा
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे बैठक में अपने-अपने कैडर की स्थिति, स्वीकृत और रिक्त पदों का विवरण, पात्र कर्मचारियों की जानकारी तथा पदोन्नति संबंधी नियमों के साथ उपस्थित हों। सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने का है ताकि निर्णय में किसी तरह की तकनीकी बाधा न आए।
कर्मचारी संगठनों ने जताई आपत्ति
सरकार की इस पहल का जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी स्वागत कर रहे हैं, वहीं कुछ कर्मचारी संगठनों ने आपत्ति भी दर्ज कराई है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले न्यायालय के समक्ष अलग रुख अपनाया था, इसलिए मौजूदा प्रक्रिया पर स्पष्टता आवश्यक है।
क्या होगा बड़ा असर?
यदि सरकार की यह पहल सफल रहती है, तो एक दशक से अधिक समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। इसके साथ ही खाली पड़े प्रशासनिक पद भरने का रास्ता भी साफ होगा, जिससे सरकारी कामकाज की गति बढ़ने और नई भर्तियों के अवसर बनने की उम्मीद है। अब सबकी निगाहें 29 जून को होने वाली हाई-लेवल बैठक पर टिकी हैं, जहां लिए गए फैसले मध्य प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।