Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Apr, 2026 06:55 PM

अगर एल मुरुगन तमिलनाडु से विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो नियमों के तहत उन्हें राज्यसभा सदस्यता छोड़नी होगी।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति इस समय दक्षिण भारत के चुनावी रण से गहराई से जुड़ गई है। वजह साफ है—प्रदेश से राज्यसभा सांसद George Kurian और केंद्रीय मंत्री L. Murugan इस बार केरल और तमिलनाडु की विधानसभा सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अब सबकी निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं, क्योंकि इनका असर सीधे MP की सियासत पर पड़ने वाला है।
दरअसल, मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें पहले ही खाली मानी जा रही हैं। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Digvijaya Singh, भाजपा के Sumer Singh Solanki और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल पूरा हो चुका है। लेकिन असली सस्पेंस चौथी सीट को लेकर बना हुआ है।
अगर एल मुरुगन तमिलनाडु से विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो नियमों के तहत उन्हें राज्यसभा सदस्यता छोड़नी होगी। ऐसे में मध्य प्रदेश से एक और सीट खाली हो जाएगी और कुल सीटों की संख्या तीन से बढ़कर चार हो सकती है। यानी प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर मुरुगन और कुरियन जैसे चेहरे केंद्र की राजनीति से बाहर होते हैं, तो प्रधानमंत्री Narendra Modi की टीम में मध्य प्रदेश से नए चेहरों को मौका मिल सकता है। कई दिग्गज नेता पहले से ही दिल्ली की दौड़ में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, दक्षिण के चुनावी नतीजे इस बार मध्य प्रदेश की सियासत की दिशा और दशा दोनों तय कर सकते हैं—अब देखना होगा कि 4 मई को आने वाले फैसले किसके लिए नए दरवाजे खोलते हैं और किसके लिए सियासी समीकरण बदल देते हैं।