Edited By Himansh sharma, Updated: 12 Jul, 2026 03:26 PM

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट बदलने के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट बदलने के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल से महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद अपने रुख में स्पष्ट बदलाव के संकेत दिए हैं। इसके तुरंत बाद उनका दिल्ली रवाना होना प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
दतिया सीट पर भाजपा ने इस बार नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट बदलने के फैसले के बाद क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं और मिश्रा समर्थकों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आई। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए, कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफों की घोषणा की और राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें भी तेज हो गईं कि नरोत्तम मिश्रा कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
हालांकि, पिछले 24 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला है। भोपाल में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठक के बाद नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से संगठन को सर्वोपरि बताते हुए साफ किया कि उनका उद्देश्य दतिया में भाजपा की जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन कार्यक्रम में स्वयं उपस्थित रहेंगे। इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक पार्टी नेतृत्व के साथ बढ़े विश्वास और संगठनात्मक अनुशासन के संदेश के रूप में देख रहे हैं।
इसी बीच रविवार सुबह नरोत्तम मिश्रा का दिल्ली रवाना होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी मुलाकात में दतिया उपचुनाव के साथ-साथ भविष्य की राजनीतिक भूमिका पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और टिकट को लेकर कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भावनाओं में दिए गए इस्तीफों को स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर भाजपा प्रत्याशी को विजयी बनाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने नरोत्तम मिश्रा को पार्टी का वरिष्ठ और अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि चुनाव उनके मार्गदर्शन में ही लड़ा जाएगा।
भाजपा संगठन की ओर से जारी बयान में भी दोहराया गया कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ता उसी के अनुरूप चुनाव अभियान में जुटेंगे। संगठन ने संदेश दिया कि व्यक्तिगत नाराजगी से ऊपर उठकर दतिया में भाजपा की जीत सुनिश्चित करना ही सभी का लक्ष्य है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरह पहले टिकट कटने के बाद नाराजगी की खबरें सुर्खियों में थीं और अब नरोत्तम मिश्रा स्वयं संगठन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, उससे दतिया का राजनीतिक माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है। फिलहाल सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली संभावित बैठकों और आने वाले दिनों में भाजपा की आगे की रणनीति पर टिकी हुई हैं।