Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Sep, 2026 05:23 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में नेताओं के बयानों के अपने मायने निकाले जाते रहे हैं।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश की राजनीति में नेताओं के बयानों के अपने मायने निकाले जाते रहे हैं। अब पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का शिवपुरी में दिया गया एक बयान इसी वजह से चर्चा में आ गया है। ब्राह्मण समाज के सम्मान समारोह में पहुंचे मिश्रा ने अपने संबोधन के दौरान सांप और जुगनू की कहानी सुनाई। उन्होंने कहानी तो सामान्य अंदाज में सुनाई, लेकिन उसके संदेश को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दरअसल, कार्यक्रम के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उनके एक मित्र ने उनसे सवाल किया था कि जब वह कुछ बोल भी नहीं रहे हैं, फिर भी उनकी आलोचना क्यों हो रही है। इसी बात के संदर्भ में उन्होंने एक किस्सा सुनाने की बात कही। इसके बाद उन्होंने सांप और जुगनू की कहानी सुनाई। मिश्रा के मुताबिक, एक सांप लगातार जुगनू का पीछा कर रहा था। जुगनू ने रुककर सांप से पूछा कि आखिर उसकी उससे क्या दुश्मनी है या कोई पुरानी अदावत है, जो वह लगातार उसके पीछे पड़ा है। इस पर सांप ने जवाब दिया कि न तो कोई दुश्मनी है और न ही कोई पुरानी अदावत, लेकिन जुगनू की चमक उससे देखी नहीं जा रही।
नरोत्तम मिश्रा की इस कहानी के बाद कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर ‘दादा तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ और ‘हमारा नेता कैसा हो, नरोत्तम मिश्रा जैसा हो’ जैसे नारे सुनाई दिए।
कहानी के बहाने सियासी संदेश की चर्चा
नरोत्तम मिश्रा ने अपनी कहानी में किसी नेता या संगठन के पदाधिकारी का नाम नहीं लिया। यही वजह है कि अब उनके बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर सांप और जुगनू के जरिए मिश्रा किस ओर इशारा कर रहे थे?
उनके समर्थक इस बयान को उनके राजनीतिक अनुभव और मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषण में इसे बीजेपी के भीतर चल रही विभिन्न चर्चाओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, मिश्रा ने अपने संबोधन में किसी व्यक्ति का नाम लेकर कोई आरोप नहीं लगाया।
शिवपुरी का मंच क्यों बना चर्चा का केंद्र?
शिवपुरी में दिया गया यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा का यहां पहुंचकर इस तरह की कहानी सुनाना राजनीतिक चर्चाओं के लिए पर्याप्त आधार बन गया।
समर्थकों की नारेबाजी ने बढ़ाया सियासी ताप
कहानी खत्म होते ही जिस तरह समर्थकों ने नारे लगाए, उससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक राजनीतिक नजर आया। नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में लगे नारों ने यह जरूर दिखाया कि उनके समर्थकों के बीच उनकी राजनीतिक सक्रियता और भूमिका को लेकर अब भी उत्साह मौजूद है।
फिलहाल ‘सांप-जुगनू’ की कहानी के जरिए नरोत्तम मिश्रा ने किसे संदेश दिया, यह साफ नहीं है। लेकिन बिना किसी का नाम लिए कही गई इस कहानी ने मध्य प्रदेश की सियासत में चर्चा जरूर छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में मिश्रा इस बयान को लेकर कोई और स्पष्टीकरण देते हैं या फिर कहानी को राजनीतिक संदेश मानने की चर्चाएं ही आगे बढ़ती हैं।