Edited By Himansh sharma, Updated: 06 Jun, 2026 04:33 PM

मध्य प्रदेश के बिलासपुर में NEET पेपर लीक के विरोध में हुआ छात्र आंदोलन अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले चुका है।
बिलासपुर: मध्य प्रदेश के बिलासपुर में NEET पेपर लीक के विरोध में हुआ छात्र आंदोलन अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले चुका है। कांग्रेस और NSUI के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, जिला शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
पुलिस का दावा है कि 3 जून को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के निवास का घेराव करने निकले प्रदर्शनकारियों को रोकने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हालांकि, इस कार्रवाई ने कई राजनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। NEET पेपर लीक जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर छात्रों के समर्थन में उतरे विपक्षी नेताओं पर दर्ज एफआईआर को कांग्रेस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में पेश कर सकती है, जबकि सरकार और प्रशासन इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला है, या फिर छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीतिक टकराव का नया अ
ध्याय शुरू हो चुका है? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्माने के संकेत मिल रहे हैं। फिलहाल, NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब सड़कों से निकलकर थाने और अदालतों तक पहुंच गया है, जहां इसकी अगली लड़ाई तय होगी।