Edited By Vandana Khosla, Updated: 24 Apr, 2026 02:26 PM

भोपाल: मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार स्तर पर खरीदी व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की उपज का एक-एक दाना हर हाल में...
भोपाल: मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार स्तर पर खरीदी व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की उपज का एक-एक दाना हर हाल में खरीदा जाए। सरकार का फोकस साफ है—किसान को किसी भी स्थिति में नुकसान न हो।
इस वर्ष प्रदेश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते खरीदी केंद्रों पर दबाव बढ़ गया है। कई वेयरहाउस पहले से ही गेहूं से पूरी तरह भरे हुए हैं, जिससे नई फसल के भंडारण में दिक्कतें सामने आ रही हैं। इसके अलावा बोरे (बारदाना) की कमी और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर अतिरिक्त भार ने भी प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
हालांकि इन तमाम चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय बनाते हुए खरीदी लक्ष्य बढ़ाने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश की मांग पर केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कोटा 22 लाख मीट्रिक टन बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और संसाधनों की सीमाओं के बावजूद सरकार पूरी मजबूती के साथ व्यवस्थाओं को संभाल रही है। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसानों के हित में पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी हाल में उपज की खरीदी प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
एक तरफ किसानों की उम्मीद है कि उनकी पूरी फसल समय पर और उचित मूल्य पर बिके, तो दूसरी तरफ सीमित स्टोरेज क्षमता, बारदाने की कमी और बढ़ते दबाव ने प्रशासनिक चुनौती खड़ी कर दी है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि हर स्तर पर निगरानी रखकर व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।