Edited By Vandana Khosla, Updated: 03 Jun, 2026 01:37 PM

CG Desk: छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बीकेएस रे का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। रे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका उपचार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में किया जा रहा था,...
CG Desk: छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बीकेएस रे का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। रे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका उपचार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में किया जा रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से प्रशासनिक, शैक्षणिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर व्याप्त है।
आईएएस रे 1972 बैच के अधिकारी थे। उन्हें राज्य के अनुभवी और सम्मानित प्रशासकों में गिना जाता था। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद प्रशासनिक ढांचे को सुद्दढ़ बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अपने लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने गृह, परिवहन तथा विमानन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। सेवा के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने संस्थागत विकास तथा प्रशासनिक क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वह प्रशासन अकादमी के महानिदेशक के पद पर भी रहे।
इसके अलावा उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल तथा व्यावसायिक परीक्षा मंडल के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और कई महत्वपूर्ण नीतिगत एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े रहे। रे को अध्ययनशील और चिंतनशील अधिकारी के रूप में भी पहचान मिली। सेवानिवृत्ति के पश्चात भी वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे तथा प्रशासन, शिक्षा, सुशासन और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों पर अपने विचार लेखों और व्याख्यानों के माध्यम से निरंतर साझा करते रहे। उन्होंने विभिन्न विषयों पर पुस्तकों का लेखन भी किया।
प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोगों के अनुसार रे ने शासन व्यवस्था को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संस्थानों को मजबूत बनाने और सुशासन की संस्कृति विकसित करने में भी अहम योगदान दिया। प्रशासन अकादमी में उनके कार्यकाल को इस द्दष्टि से विशेष रूप से याद किया जाता है। पूर्व आईएएस रे के निधन पर वर्तमान एवं पूर्व नौकरशाहों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्हें एक कुशल प्रशासक, विद्वान अधिकारी और संस्थागत विकास के समर्थक के रूप में श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है।